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Showing posts from October, 2025

विकसित भारत बिल्डाथॉन2025

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  विकसित भारत बिल्डाथॉन2025 पोस्ट संख्या-74 स्वदेशी को अपनाना है। विदेशी को भगाना है।। आत्मनिर्भर बनकर ही, नवाचार दिखाना है।। शिक्षा एवं साक्षर विभाग , शिक्षा मंत्रालय,नीति आयोग। अटल इनोवेशन मिशन से, नव होगा चिन्तन मनन।। सर्वप्रथम जागरूक करें, सामूहिक शिक्षक वर्ग को। रजिस्ट्रेशन करके स्कूल की, निभायें शिक्षक कर्म को।। तीन से पाँच छात्रों की, बनाकर टीम कुशल। विकसित भारत निर्माण को मिलकर करें सफल ।। वोकल फॉर लोकल, आत्मनिर्भर भारत। स्वदेशी, समृद्ध भारत, चार मुख्य हैं थीम।। एक थीम चुनो या चारों ही, निर्भर करता शिक्षक-छात्र पर। एक टीम बनाओ या अधिक, निर्भर है आपके प्रयास पर ।। समस्या ढूँढें,समाधान करें दिखाकर अपना हुनर। वीडियो यां प्रोटोटाइप अपलोड करें  तीन से पाँच मिनट की फिर।। ज़िला राज्य नेशनल स्तर पर छात्र आगे बढ़ेंगे। हम हैं निवासी भारत के "पूर्णिमा"योगदान डाल दें।। डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  7/10/25

विकसित भारत बिल्डाथॉन :एक महत्वपूर्ण पहल

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  विकसित भारत बिल्डॉथान :एक महत्वपूर्ण पहल  पोस्ट संख्या-73 भारत एक तीव्र गति से उभरती हुई शक्ति है, जो आने वाले वर्षों में विश्व के शीर्ष विकसित देशों में स्थान प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। इसी विचार को साकार करने के लिए “विकसित भारत बिल्डाथॉन” एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम युवाओं, नवाचारकर्ताओं और उद्यमियों को एक मंच प्रदान करता है, जहाँ वे भारत के विकास के लिए नए विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं।विकसित भारत बिल्डॉथान का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी की रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें देश के विकास से सीधे जोड़ना है। इसके माध्यम से प्रतिभागी शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, डिजिटल सेवाओं और शासन से संबंधित समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित होते हैं। यह पहल 2047 तक भारत को “विकसित राष्ट्र” बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।बिल्डॉथान की विशेषता है कि यह एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है, जिसमें विद्यार्थी, स्टार्टअप्स और संस्थाएं भाग ले सकते हैं। इसमें प्रतिभागियों को वास्तविक समस्याओं पर आधारित थीम्स दी जाती हैं, जिन पर उ...

घमंड से तख्त-ओ-ताज़ भी राख बन गये !!

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  घमंड से तख्त-ओ-ताज़ भी राख बन गये !! पोस्ट संख्या-72 जिन्हें चहुं ओर सिर्फ अच्छाई ही दिखती है। ऐसे लोगों की अच्छाई औरों को खटकती है।। अपने हुनर से बढ़ा कदम फिक्र न कर साकी, ईर्ष्यालु लोगों की आत्मा सदैव भटकती है।। हौंसला न कर पस्त कंकर चुन ले राह के, शीर्ष पे पहुँचे राही की मुश्किल सदा बढ़ती है।। घमंड से तख्त-ओ-ताज़ भी राख बन गये , किसी को नीचा दिखाकर किस्मत बिगड़ती है।। नेक नीयत साफ दिल खाते हैं ठोकर कलियुग में फिर भी तू 'पूर्णिमा' सपना राम-राज्य का बुनती है।। डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  2/10/25