मेरी तन्हाई--एक लिफाफा (भाग-14)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई--एक लिफाफा (भाग-14) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब खूबसूरत होना लाज़मी नहीं है ।खूबसूरती को सजा कर रखना एक कला है। हर वह चीज खूबसूरत है जिसके साथ खट्टी-मीठी यादें जुड़ी होती है ।हम यह नहीं कह सकते कि कोई याद बुरी है तो उसके अहसास भी बुरे होंगे क्योंकि बुरे अहसास से भरी यादें भी कई बार हमें कुछ ऐसे सबक दे जाती हैं जिनके अहसास हमें बाद में मीठा लगने लगता है। बस यूं ही इधर-उधर की बातों में गुमसुम कभी किसी नुक्कड़ की तरफ ध्यान जाता है तो कभी किसी स्टोर रूम की तरफ ।कभी पुरानी यादों में मन बह जाता है तो कभी वर्तमान में जीने की उम्मीद जाग उठती है। अपने ख्यालों में डूबना सबको अच्छा लगता है पर आजकल ख्यालों में डूबे रहने का वक्त हर एक के पास नहीं है। जिंदगी इतनी अधिक बोझिल हो चुकी है कि हर एक व्यक्ति संतुष्टि चाहता है। जिसके पास जिस चीज की कमी होती है ,उसका ध्यान उस चीज की और ज्यादा अधिक जाता है ।पर जो पास में है उसका ध्यान नहीं हो पाता है। पास में जो है उसको सहेज कर रखना बहुत ही मुश्किल कार्य लगता है । पर मुझे आज भी याद है वह दिन जिसे मैं कभी नहीं भूल पाती हूँ। वह यादें ...