मेरी तन्हाई-- होमवर्क (भाग-16)डॉ.पूर्णिमा राय , पंजाब
मेरी तन्हाई-- होमवर्क (भाग-16) डॉ.पूर्णिमा राय , पंजाब एक वक्त था, जब झूठ बोला जाता था तो आपकी आँखें और आपका चेहरा सब सच उगल देता था। जितना भी सच छुपाना चाहें,आप पकड़े जाते थे। आप झूठ का नकाब पहन कर सच को छुपा नहीं सकते थे। एक बार तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली अनन्या से मुझे मिलने का मौका मिला ।वह अपना होमवर्क कर रही थी ।बड़े प्यार से किताबों की दुनिया में गुम हुई अनन्या निरंतर कभी किसी कॉपी को निकाल कर,कभी किताब को निकाल कर अपना होमवर्क करने में लगी हुई थी। जैसे ही मैंने उसकी हिंदी की कॉपी देखी । बहुत ही सुंदर लिखावट थी। हिंदी की शिक्षिका होने के नाते मेरा ध्यान त्रुटियों की ओर चला गया। मुझे त्रुटियाँ नजर आ गई ।जैसे-जैसे पेज़ आगे पलटती जा रही थी ,कहीं ना कहीं कोई त्रुटि दिख जा रही थी। मैंने प्यार से पूछ लिया ,"क्या !तुम्हारी शिक्षिका गलतियाँ नहीं निकलती !अरे निकालती है ना सब! मैं ठीक ही लिखती हूँ। मेरी कोई गलती ही नहीं निकलती है। उसकी मंद-मंद प्यारी मुस्कान से बाल मन की अवस्था और शिक्षिका के प्रति स्नेह साफ दिखाई दे रहा था।मैंने कहा, अच्छा! तुम तो फिर बहुत ...