मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब गम की राहों पर चलना ज़रा होशियारी से, खुशियों के फूल खिलते हैं सिर्फ मेहनत से!! जब हम कोई उम्मीद नहीं रखते हैं तो कभी-कभी कुछ ऐसा होता है कि हमारे भीतर स्वत: ही और अधिक ऊर्जा का संचार होना आरंभ हो जाता है। आप सबके जीवन में आए दिन कोई ना कोई खुशी या गमी आती रहती होगी, क्योंकि यह जिंदगी है ।मैंने शायद पहले भी कहीं जिक्र किया होगा कि कोई भी कार्य जो हमने कभी ना किया हो जब हम पहली बार करते हैं तो उसका अनुभव कुछ अलग ही होता है।ऐसे ही मैंने जीवन में कसरत /व्यायाम/योगाभ्यास को कभी महत्व नहीं दिया। पर जब महत्व देने लगी तो अपने भीतर एक सुकून का अनुभव होने लगा। सहजावस्था आने लगी।अपने लिए तो हम अपने पैसे खर्च करके कुछ ना कुछ खरीदते ही रहते हैं या हम दूसरों के लिए भी कई बार कुछ खरीद कर दे देते हैं। कहते हैं जो मन में ठान लो वह आपको मिल जाएगा ।पर कुछ लोग जब कहते हैं कि हमने सोचा था, हमें वह मंजिल नहीं मिली ।तब मन का विचलित होना आवश्यक है।बात चाहे आपको छोटी लगी पर मुझे आपको बताते हुए अच्छा महसूस हो रहा है। मैंनें फरवरी में फ्री ऑ...