मेरी तन्हाई--सुकून (भाग-18)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई--सुकून (भाग-18) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब सुबह-सुबह जल्दी उठकर कुदरत का आनंद लेना, पेड़ों की हसीन खिलती हुई टहनियों में गुम हो जाना, राह में मिलते हुए मुसाफिरों को देखकर प्रसन्नचित हो जाना ,आसपास का शांत वातावरण और पास से गुजरती हुई मोटर गाड़ियों की मद्दिम आवाज़ पल भर के लिए आपको आपके अस्तित्व से थोड़ा दूर ले जाती है ।एक ऐसे सुकून की ओर जो आपने कभी अकेले में रहकर भी महसूस ना किया हो ।अक्सर लोग सोचते हैं कि अकेले रहने में ही आनंद है ।अगर हम कुछ समय के लिए अकेले रह लेंगे तो शायद हमें एक आनंद की अनुभूति होगी। हमारा दिमाग व हमारा दिल शांत हो जाएगा। पर मुझे लगता है कि ऐसा नहीं है। हम इंसानों से दूर होकर महसूस करते हैं कि हम अकेले हो गए हैं।घर में अगर सास ज्यादा अधिक बात करती है तो बहू उससे दूर होकर अकेलेपन का अनुभव करना चाहती है। अगर पति-पत्नी में कहीं झगड़ा हो रहा है तो वह दोनों एक दूसरे से दूर होकर कुछ समय के लिए अकेले रहने का आनंद लेना चाहते हैं। बच्चों को अगर माता-पिता अधिक डांटते हैं तो बच्चे भी उनसे दूर होकर अकेले होकर रहना चाहते हैं । दरअसल किसी को भी यह बा...