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Teacher's Day Celebration💐

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  Teacher's Day Celebration💐 SOE FOR GIRLS MALL ROAD ,AMRITSAR ਅੱਜ ਮਿਤੀ 5 ਸਤੰਬਰ ਨੂੰ ਸਕੂਲ ਆਫ਼ ਐਮੀਨੈਂਸ ਫਾਰ ਗਰਲ਼ਜ ਮਾਲ ਰੋਡ ਵਿਖੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਮੈਡਮ ਸ਼੍ਰੀਮਤੀ ਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਜੀ ਦੀ ਰਹਿਨੁਮਾਈ ਹੇਠ ਅਧਿਆਪਕ ਦਿਵਸ ਬਹੁਤ ਹੀ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਅਤੇ ਸੁਚੱਜੇ ਢੰਗ ਨਾਲ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ। ਅਧਿਆਪਕ ਦਿਵਸ ਦਾ ਸੁਚਾਰੂ ਪ੍ਰਬੰਧ ਅਤੇ ਸੰਚਾਲਨ ਲੈਕਚਰਾਰ ਮੈਡਮ ਆਦਰਸ਼, ਲੈਕਚਰਾਰ ਮਨਦੀਪ ਕੌਰ,ਮੈਡਮ ਰਮਨ ਕਾਲਿਆ, ਹਿਸਾਬ ਅਧਿਆਪਿਕਾ ਮੈਡਮ ਇਤੀ ਸ਼ਰਮਾ ਅਤੇ ਕੰਪਿਊਟਰ ਅਧਿਆਪਿਕਾ ਮੈਡਮ ਈਸ਼ਾ ਵੱਲੋਂ ਬਾਖੂਬੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਮੈਡਮ ਵੱਲੋਂ ਸਟੇਟ ਅਵਾਰਡ ਲਈ ਨਾਮਜ਼ਦ ਲੈਕਚਰਾਰ ਕਮਲ ਅਰੋੜਾ ਅਤੇ ਕੰਪਿਊਟਰ ਫੈਕਲਟੀ ਪਰਮ ਆਫ਼ਤਾਬ ਸਿੰਘ ਨੂੰ ਸਟੇਟ ਅਵਾਰਡ ਦੇ ਹੱਕਦਾਰ ਦੱਸਦਿਆਂ ਹੋਇਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤੌਰ ਤੇ ਸ਼ੀਲਡ ਦੇ ਕੇ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਸਕੂਲ ਦੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਵੱਲੋਂ ਸਕੂਲ ਦੇ ਸਮੂਹ ਸਟਾਫ ਨੂੰ ਸਕੂਲ ਵਿੱਚ ਨਿਭਾਈਆਆਂ ਸ਼ਲਾਘਾਯੋਗ ਸੇਵਾਵਾਂ ਸਦਕਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਕੇ ਹੌਂਸਲਾ ਅਫਜ਼ਾਈ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਮੈਡਮ ਆਦਰਸ਼ ਵੱਲੋਂ ਸਮੂਹ ਸਟਾਫ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨ ਚਿੰਨ ਵਜੋਂ ਬੈਚ ਭੇਂਟ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਮੈਡਮ ਇਤੀ ਸ਼ਰਮਾ ਵੱਲੋਂ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੀ ਸ਼ਮੂਲੀਅਤ ਕਰਵਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਵੱਖ ਵੱਖ ਪ੍ਰੇਰਨਾਦਾਇਕ ਅਤੇ ਮਨੋਰੰਜਕ ਭਰਪੂਰ ਛੋਟੀਆਂ-ਛੋਟੀਆਂ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੀਆਂ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਕਰਵਾ ਕੇ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਵਿੱਚ ਰੰਗ ਬੰਨ੍ਹਿਆ ਗਿਆ। ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਨੇ ਵੀ ਆਪਣੇ ਅਧਿਆਪਕਾਂ...

आपबीती ---खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह ,हो गई नव जगमगाहट

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  आपबीती ---खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह ,हो गई नव जगमगाहट----------(डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब) रात (31अगस्त )को निश्चिंत होकर सो गई कि अब सुबह आराम से ऊठूँगी और अपने सितंबर महीने के कार्य का आगाज करूँगी ।ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर होने के नाते हमें अपने विजिट करने वाले स्कूलों की सूचना पहले फार्म में भरनी होती है ।आज मैंने एक दिन पहले ही वह सूचना भर दी और रात को सो गई। सोये हुए अचानक मुझे एकदम से गोल-गोल सिर घूमने जैसा महसूस हुआ । यह चक्कर बहुत ही खतरनाक था।उस वक्त मेरे मन से यही आवाज आई कि हे भगवान मुझे कुछ नहीं होगा! मैंनें इसी अवस्था में दोनों हाथों की मुट्ठियों को भींच लिया और अपने आप को समझाया कि मुझे कुछ नहीं होगा ।पर चक्कर रुक-रुक आते ही जा रहे थे। मैंनें उठने का प्रयास किया, पर उठ नहीं पाई। फिर मैंनें दायीं करवट बदलनी चाही तो भी मेरा सिर बहुत तेज घूमा। मैंनें फिर बाईं तरफ कोशिश की तो भी मेरा सिर बहुत तेजी से घूमने लगा।इस समय मैं बहुत घबरा भी रही थी और डर भी रही थी ।यही मन में आ रहा था कि कहीं मुझे कुछ हो ना जाये। इसी बीच मेरे हाथ भी सुन्न होने लग गए थे ।थोड़ी देर बाद मैंनें ...

दोहे_पूर्णिमा :रोजगार की खोज में

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  दोहे_पूर्णिमा :रोजगार की खोज में दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी, लोगों की यह भीड़! रोजगार की खोज में,लगी टूटने रीढ़!!१ जनसँख्या दर रोकनी, कुछ तो करो उपाय! शिक्षित हों उल्लास से,बढ़ जायें व्यवसाय!!२ जागृत हों वोटर सभी ,मत निर्णय हकदार! आत्मसजगता भाव ही,प्रगति का आधार!!३ भूख-गरीबी मार से ,लोग हैं परेशान! वोट के बदले नोट से,कहाँ मिले सम्मान!!४ दर-दर भटके जिंदगी,भूत भविष्य वर्तमान! कहे 'पूर्णिमा' विश्व से ,श्रम करना आसान!!५                डॉ.पूर्णिमा राय,  शिक्षिका एवं लेखिका ,पंजाब 11जुलाई ,2026

मेरी तन्हाई-- वापसी (भाग-30)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई-- वापसी (भाग-30) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब अवकाश के दिनों का पता ही नहीं चलता कि कब खत्म हो जाते हैं ।और कभी-कभी ऐसा लगता है कि अवकाश आता ही क्यों है ?समय बीते ही नहीं बिताया जाता है।  इस बार गर्मियों की छुट्टियां जब आई तो पता ही नहीं चला कि कैसे वक्त बीत गया और अब लग रहा है कि क्या आज अंतिम अवकाश का दिन है! सोच रही हूँ कि अवकाश का आनंद सिर्फ अपने मन पर निर्भर करता है। अपनी दिनचर्या से अलग जब हमें अवकाश मिलता है तो हमें काफी अच्छा महसूस होता है। अवकाश और दिनचर्या में फर्क बस इतना होता है कि हम दैनिक कार्यों से अलग होकर वह कार्य करते हैं जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा नहीं होता ।इसलिए हमें अवकाश का आनंद अधिक आता है।इस बार की छुट्टियों में एक भी पल ऐसा नहीं गुजरा जिसमें अपने लिए समय अर्थात खाली समय मिला हो। शिक्षा विभाग की ओर से मेरीटोरियस स्कूल में समर कैंप का आयोजन हुआ। छात्रों को नव तकनीक से शिक्षित किया गया।साथी ऐप पर छात्रों की ऑनलाइन कक्षाओं का कार्य चला। जनगणना संबंधी कार्य ,एस आई आर ,ड्रगस एंवं सोशल इकोनामिक्स जनगणना में अधिकारियों के ड्यूटी चली। ब्राइट माइ...

मेरी तन्हाई-- समय (भाग-29)डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब

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मेरी तन्हाई-- समय (भाग-29) डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब हे ईश्वर !हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है? हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? हम पर ही मुसीबत के पहाड़ क्यों टूट पड़ते हैं? बार-बार तुम हमारे ही घर पर गमों को दस्तक देने के लिए भेज देते हो ?आखिर ऐसा क्यों होता है? हम भी तो तेरे ही बनाए हुए इंसान है? हमारी भी रगों में  अन्य लोगों जैसा ही खून है ?हमने ऐसे कौन से पाप किए हैं ,जिनकी सजा तुम हमें दे रहे हो! एक मुसीबत खत्म नहीं होती ,दूसरी मुसीबत आ जाती है। इन सवालों के कटघरे में हम अपने मन के साथ-साथ अपने भगवान को भी जिस पर हमें विश्वास है, उस ईश्वर को भी कटघरे में खड़ा कर देते हैं। सवालों की जड़ी लगा देते हैं। पर हम शांत मन से सहजावस्था में चाहकर भी उस मुसीबत के दौर से  गुजर नहीं पाते हैं। वह समय बिताये नहीं बीतता है ।हर पल दु:खद एहसास होता रहता है ।यह सब हमारी मानसिक अवस्था एवं भावनात्मक स्तर पर निर्भर करता है ।जब हम दुनिया में इधर-उधर झांकते हैं,अपने स्व: के दुख से इतर इधर-उधर देखते हैं तो हमें आए दिन कोई ना कोई ऐसी दुर्घटना नजर आ जाती है, जिसके साथ साधारणीकरण होने पर हमे...

मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  गम की राहों पर चलना ज़रा होशियारी से, खुशियों के फूल खिलते हैं सिर्फ मेहनत से!! जब हम कोई उम्मीद नहीं रखते हैं तो कभी-कभी कुछ ऐसा होता है कि हमारे भीतर स्वत: ही और अधिक ऊर्जा का संचार होना आरंभ हो जाता है। आप सबके जीवन में आए दिन कोई ना कोई खुशी या गमी आती रहती होगी, क्योंकि यह जिंदगी है ।मैंने शायद पहले भी कहीं जिक्र किया होगा कि कोई भी कार्य जो हमने कभी ना किया हो जब हम पहली बार करते हैं तो उसका अनुभव कुछ अलग ही होता है।ऐसे ही मैंने जीवन में कसरत /व्यायाम/योगाभ्यास को कभी महत्व नहीं दिया। पर जब महत्व देने लगी तो अपने भीतर एक सुकून का अनुभव होने लगा। सहजावस्था आने लगी।अपने लिए तो हम अपने पैसे खर्च करके कुछ ना कुछ खरीदते ही रहते हैं या हम दूसरों के लिए भी कई बार कुछ खरीद कर दे देते हैं। कहते हैं जो मन में ठान लो वह आपको मिल जाएगा ।पर कुछ लोग जब कहते हैं कि हमने सोचा था, हमें वह मंजिल नहीं मिली ।तब मन का विचलित होना आवश्यक है।बात चाहे आपको छोटी लगी पर मुझे आपको बताते हुए अच्छा महसूस हो रहा है। मैंनें फरवरी में फ्री ऑ...

मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब जिंदगी बहुत ही अजीब है ।एक पल में गम के बादल आ जाते हैं तो दूसरे पल में सुख की घटाएं भी दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं‌। लोग कहते हैं कि बादल छा गए हैं ,काली घटाएं आ रही है  पर बादलों के बीच में से चमकती हुई बिजली की तरह सफेद रंग की लकीरें हैं ,वह भी जिंदगी जीने की उम्मीद जगा देती हैं।बस ऐसा ही कुछ आजकल मेरे साथ चल रहा है ।कभी खुशियाँ इतनी आ रही है कि समेट नहीं पा रही और कभी आंँखों से बरसात होने लगती है।कभी दिल पिघल कर मोम जैसा बन जाता है । तो कभी चट्टान जैसा पत्थर दिल हो जाता है।कभी सोचती हूँ कि जिंदगी इम्तिहान ले रही है, परीक्षाएं ले रही है ,क्या मैं उन परीक्षाओं में पास हो पाऊँगी ?बस इसी उधेड़बुन में जिंदगी बीत रही है। छोटी-छोटी खुशियों को बटोरती हुई जिंदगी आगे बढ़ती चली जा रही है ।आज ब्राइट माइंड पंजाब -2026 का प्रोग्राम गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में दशमेश ऑडिटोरियम में हुआ ।जिसमें शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस जी ,मनीष सिसोदिया जी, डायरेक्टर पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग सकत्तर  सिंह बल जी एवं अन्य उच्च ...