मेरी तन्हाई-अहसास (भाग-8)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई-अहसास (भाग-8) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब दिल लग गया है तुम्हारा !कोई मुश्किल तो नहीं आ रही! सब ठीक चल रहा है! खाना अच्छा है !तुम लोगों ने कद्दू की सब्जी क्यों नहीं ली? 25 दिवसीय समर कैंप के दौरान अमृतसर के मेरीटोरियस स्कूल में लंच के समय छात्राओं से मैंने विचार-विमर्श करते हुए स्नेह भरे लहज़े से उपर्युक्त प्रश्न पूछे। छह: जिलों के छात्र-छात्राएँ यहाँ नई शिक्षा तकनीक से रूबरू होने के लिए और गर्मियों की छुट्टियों का सदुपयोग करने के लक्ष्य से आए हुए हैं। मेरे पूछने पर एक छात्रा ने बताया कि हॉस्टल में रहना बहुत ही आनंददायक है ।यहाँ पर हमें काफी अच्छा लग रहा है, हमारा मन लग गया है। सारा दिन ठीक निकल जाता है पर जब रात आती है तो हमें अपनी माँ का एहसास होने लगता है। माँ की ममता की कमी महसूस होती है क्योंकि हम अपनी मम्मी के बिना अधिक दिन तक बाहर नहीं रहे। तब वहाँ पास बैठी हुई वार्डन और अन्य महिला कर्मचारी की ओर इशारा करके मैंने हँसकर कहा कि बच्चो !यह भी आपकी मम्मी की तरह हैं अगर आप रात को सोने से पहले इनको एक बार आकर मिल लेना और इनसे थोड़ी बातचीत कर लेना तो तुम्...