मेरी तन्हाई --खालीपन (भाग-1)
मेरी तन्हाई --खालीपन (भाग-1) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब एक नई उम्मीद के साथ गर्मियों की छुट्टियों का आगाज़ हुआ। शिक्षा का महाजशन, समाचार-पत्र में प्रकाशित अलग-अलग समाचार ,यूट्यूब पर हो रही चर्चाएं एक सुखद अनुभव करवा रही थी। छोटी-छोटी यादें, छात्रों का स्नेह, शिक्षकों का लगाव, दैनिक जीवन के कार्य सब एकदम से हल्कापन अनुभव करवा रहे थे पर फिर भी बार-बार मन उन्हीं सबकी ओर जा रहा था ।ऐसा लग रहा था, बहुत कुछ पीछे छूट गया है ,पर बीच-बीच में खट्टी-मीठी यादें एक नई राह दिखा रही थी। व्हाट्सएप पर मिल रहे अलग-अलग संदेश कभी सकारात्मकता और कभी नकारात्मकता मन में उत्पन्न कर रहे थे। इस बार यही सोचा था कि मन को सकारात्मक ही रहने देना है। कहते हैं जैसा सोचते हैं वैसा ही सामने प्रतिभासित होने लगता है ।भावी योजना तो कोई भी नहीं बनाई हुई थी। बस यही सोचा था जैसे ही दिन निकलेगा वैसे ही अपनी ऊर्जा के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ना शुरू कर देंगे! कुदरत से प्रेम करना किसे अच्छा नहीं लगता। गमले में लगे हुए रंग-बिरंगे पौधे, पौधों की देखभाल करना ,उनका पानी देना, उनके मुरझाए हुए पत्तों को निकाल देना यह मेरी छ...