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मेरी तन्हाई- मेहनतकश (भाग-5)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई- मेहनतकश (भाग-5) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  ऐसे ही मेरी बात जब एक मेहनतकश व्यक्ति से होती है तो वह बताता है कि एक वक्त था! जब माली  के कार्य में लोगों ने बहुत पैसे कमाए हैं। वह  एक साथ गाड़ी में बहुत सारे गमले भर-भर कर लोगों के घरों में गमले लगाने का कार्य किया करते थे। तब वह इस कार्य को बहुत अधिक महत्व देते थे ।पर अब इस कार्य में गुज़ारा करना मुश्किल हो गया तो उन्हें साथ-साथ दूसरे कार्य भी सीखने पड़े और दूसरे कार्यों में निपुणता हासिल कर  जहाँ भी कोई कार्य मिलता है वह उसको करने के लिए अपनी इच्छा प्रकट कर देते हैं। वह बताता है एक दौर था।जब किसी-किसी घर में गमले होते थे। गमले में पौधे लगाए जाते थे, क्योंकि तब घरों का वातावरण खुला होता था। लोग खुले में  जमीन में ही पौधों को लगवा लेते थे ,पर आज समय के साथ-साथ आधुनिक कारण हो गया, मशीनीकरण का युग आ गया ।जिस वजह से  खुली जमीन कम होने लगी और घरों का नगरीकरण हो गया ,जिस वजह से लोग बालकनी में , घरों के भीतर और जहाँ भी उन्हें थोड़ी बहुत जगह दिखाई देती है, वहाँ गमले सजावट के लिए रखने लगे हैं। अब ल...

मेरी तन्हाई- लक्ष्य (भाग-4)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई- लक्ष्य (भाग-4) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब दीवारों पर आई सीलन की वजह से पड़ गई दरारों को छिपाने के लिए पॉलिश और  लीपापोती करवाई जाती है। अक्सर लोग यही सोचते हैं कि बरसात आने से पहले दरोदीवार को पक्का कर लिया जाए और इन दिनों में मई-जून के महीने में थोड़ी गर्मी होती है, जिस वजह से पेंट की हुई  दीवारें आसानी से सूख भी जाती हैं और दिन भी तनिक लंबे होते हैं जिस वजह से कार्य को पूर्ण करने में आसानी लगती है। पर यह नहीं सोचा जाता कि जो लोग गर्मी के दिनों में पेंट, पॉलिश का काम करते हैं ,उन पर क्या बीतती है। हम अपने आनंद के लिए,अपने अवकाश का सही इस्तेमाल करने के लिए यह कार्य आरंभ कर देते हैं लेकिन जिसको मेहनत करनी है ,वह पूरी शिद्दत के साथ इस कार्य को करने में जुट जाता है। मकान मालिक के मन में यही रहता है कि इतने पैसे ही मुझे देने हैं, ज़रा  एक कप चाय या एक वक्त की रोटी अगर उसे देनी पड़ जाएगी तो उसको गर्मी का अहसास होने लगता है पर धूप में कार्यरत व्यक्ति के मन में यही दुविधा रहती है कि कहीं पेंट किसी दीवार से छूट न जाए , कहीं दरारे भरने में पीछे ना छूट जाऊं औ...

मेरी तन्हाई --पार्सल (भाग-3)

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मेरी तन्हाई --पार्सल (भाग-3) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब भावनाओं के बिना इंसान शून्य है। अगर भावनाएं ही न हो ,एहसास ही न हों तो मशीन और इंसान में कोई फर्क नहीं रह जाता। नींद न आने का कारण शायद यही है कि हम अपनी उम्मीदों से ज्यादा सपने देख लेते हैं, जो दैनिक जीवन में घटित होता है, उसकी अवांछित कल्पनाएं अपने मन में संजो लेते हैं ,जिस वजह से वह हलचल हमारे अंतर्मन को झकझोरती  रहती है। अपनी दुनिया में डूबा हुआ मन बेचैन रहता है। जब उसका हकीकत से सामना होता है तो वह भावनाओं के कगार पर पहुँच कर भी अपने आपको मशीन सा बना हुआ महसूस करने लगता है। अचानक फोन की घंटी बजती है और आवाज़ आती है ।मैं अर्जुन बोल रहा हूँ ,आपका पार्सल आया है? शायद अर्जुन को यह नहीं पता कि उसकी फोन घंटी बजने पर जब मैं फोन की स्क्रीन पर उसका नाम ही देखती हूँ तो समझ जाती हूँ कि मेरा पार्सल आ गया है और मुझे अब एक ओटीपी देना है। आवाज देती हूँ और कहती हूँ, मैं तनिक छत पर हूँ, नीचे नहीं आ सकती। तुम घर के अंदर दरवाजे से पार्सल को फेंक दो, मैं तुम्हें ओटीपी दे देती हूँ और निश्चिंत सा हुआ अर्जुन अपने मोटरसाइकिल की रफ्तार आ...

मेरी तन्हाई --इच्छाएं (भाग-2)

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मेरी तन्हाई --इच्छाएं (भाग-2) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब पानी की टंकी भर गई है !कृपया अपनी मोटर बंद कर दीजिए! बार-बार यह ध्वनि कानों में गूंजती रहती है, पर जिनके घर पर यह घंटी बज रही है,, उनको एहसास ही नहीं है कि कितना पानी व्यर्थ जा रहा है! पर यह सब सुनकर मैं हमेशा अलर्ट हो जाती हूँ कि कहीं मेरे घर की टंकी से पानी बेकार तो नहीं जा रहा है ।दूसरों को समझाना मुश्किल है ,पर नामुमकिन नहीं है ।यही सोचा कि जब भी वक्त मिलेगा तो मैं अपनी रचनाओं से लोगों को प्रेरित करूँगी कि पानी को व्यर्थ मत करें, जितना पानी की आवश्यकता हो, उतना ही पानी का प्रयोग करें। इंसान है भूल तो हो ही जाती है ।पहले पहले कई बार मोटर चलाकर मैं भी भूल जाती थी कि पानी की टंकी भर चुकी है पर अब धीरे-धीरे नियम बन गया है कि जब तक मोटर को घड़ी देखकर चलाती हूँ और उसको बंद कर देती हूँ। अगर हम अपनी जिंदगी के नियम बना लें तो जिंदगी जीना आसान हो जाता है। यह ठीक है कि हर नियम के अनुसार हम जीवनयापन नहीं कर सकते पर जहाँ नियमों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हमें वहाँ नियमों का पालन करना चाहिए। बस आज यही सोच रही थी कि खिड़की से बा...

मेरी तन्हाई --खालीपन (भाग-1)

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मेरी तन्हाई --खालीपन (भाग-1) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब एक नई उम्मीद के साथ गर्मियों की छुट्टियों का आगाज़ हुआ। शिक्षा का महाजशन, समाचार-पत्र में प्रकाशित अलग-अलग समाचार ,यूट्यूब पर हो रही चर्चाएं एक सुखद अनुभव करवा रही थी। छोटी-छोटी यादें, छात्रों का स्नेह, शिक्षकों का लगाव, दैनिक जीवन के कार्य सब एकदम से हल्कापन अनुभव करवा रहे थे पर फिर भी बार-बार मन उन्हीं सबकी ओर जा रहा था ।ऐसा लग रहा था, बहुत कुछ पीछे छूट गया है ,पर बीच-बीच में खट्टी-मीठी यादें एक नई राह दिखा रही थी। व्हाट्सएप पर मिल रहे अलग-अलग संदेश कभी सकारात्मकता और कभी नकारात्मकता मन में उत्पन्न कर रहे थे। इस बार यही सोचा था कि मन को सकारात्मक ही रहने देना है। कहते हैं जैसा सोचते हैं वैसा ही सामने प्रतिभासित होने लगता है ।भावी योजना तो कोई भी नहीं बनाई हुई थी। बस यही सोचा था जैसे ही दिन निकलेगा वैसे ही अपनी ऊर्जा के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ना शुरू कर देंगे! कुदरत से प्रेम करना किसे अच्छा नहीं लगता। गमले में लगे हुए रंग-बिरंगे पौधे, पौधों की देखभाल करना ,उनका पानी देना, उनके मुरझाए हुए पत्तों को निकाल देना यह मेरी छ...

ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਵਿਖੇ ਸਿੱਖਿਆ ਦਾ ਮਹਾਂ ਜਸ਼ਨ ---ਮੇਗਾ ਪੀਟੀਐਮ ਦਾ ਹੋਇਆ ਆਯੋਜਨ!

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ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਵਿਖੇ ਸਿੱਖਿਆ ਦਾ ਮਹਾਂ ਜਸ਼ਨ ---ਮੇਗਾ ਪੀਟੀਐਮ ਦਾ ਹੋਇਆ ਆਯੋਜਨ! ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਦੀ ਰਹਿਨੁਮਾਈ ਹੇਠ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਸਿੱਖਿਆ ਅਫਸਰ (ਸੈਕੰਡਰੀ ਸਿੱਖਿਆ )ਸ਼੍ਰੀ ਰਜੇਸ਼ ਕੁਮਾਰ ਸ਼ਰਮਾ, ਉਪ ਜਿਲ੍ਹਾ ਸਿੱਖਿਆ ਅਫਸਰ ਸ੍ਰੀ ਰਜੇਸ਼ ਖੰਨਾ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ-ਨਿਰਦੇਸ਼ ਅਨੁਸਾਰ ਡੀਆਰਸੀ ਡਾ.ਰਾਜਨ ਦੇ ਸਫਲ ਸੰਚਾਲਨ ਹੇਂਠ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਦੇ ਅਪਰ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ 416 ਮਿਡਲ, ਹਾਈ ਅਤੇ ਸੈਕੰਡਰੀ ਸਕੂਲਾਂ ਵਿੱਚ ਅਜ ਮਿਤੀ 30 ਮਈ ਨੂੰ ਸਿੱਖਿਆ ਦਾ ਮਹਾਂ ਜਸ਼ਨ ਬੜੇ ਸੁਚੱਜੇ ਅਤੇ ਖੂਬਸੂਰਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ। ਨੀਤੀ ਆਯੋਗ ਦੀ ਸਿੱਖਿਆ ਗੁਣਵੱਤਾ ਰਿਪੋਰਟ 2026 ਮੁਤਾਬਕ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਪਹਿਲਾ ਸਥਾਨ ਹਾਸਿਲ ਕੀਤਾ। ਸਿੱਖਿਆ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਤਹਿਤ ਸਿੱਖਿਆ ਦੀ ਇਸ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਮਹਾਨ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਨੂੰ ਅਧਿਆਪਕਾਂ,ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ,ਮਾਪਿਆਂ, ਐਸਐਮਸੀ ਕਮੇਟੀ ਮੈਂਬਰਾਂ ,ਪਿੰਡ ਦੇ ਪਤਵੰਤੇ ਸੱਜਣਾਂ ਨਾਲ ਸਾਂਝਾ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਇਸ ਮਹਾਂ ਜਸ਼ਨ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਸਿੱਖਿਆ ਅਫਸਰ ,ਉਪ ਜਿਲ੍ਹਾ ਸਿੱਖਿਆ ਅਫਸਰ ਅਤੇ ਡੀਆਰਸੀ ਡਾ. ਰਾਜਨ ਵੱਲੋਂ ਅੱਜ ਸਰਕਾਰੀ ਹਾਈ ਸਕੂਲ ਅਦਲੀਵਾਲਾ, ਸਰਕਾਰੀ ਮਿਡਲ ਸਕੂਲ ਬੂਆ ਨੰਗਲੀ ,ਸਰਕਾਰੀ ਮਿਡਲ ਸਕੂਲ ਲੋਹਾਰਕਾ ਕਲਾਂ ,ਸਰਕਾਰੀ ਸੀਨੀਅਰ ...

आदर्श कक्षा

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  आदर्श कक्षा (कविता) पोस्ट संख्या -80 बच्चों के सपनों की आदर्श कक्षा । ऐसी कक्षा में छात्रों को मिले सुरक्षा ।। डर का तनिक भी नाम ना हो । सम्मान मिले ,अपमान ना हो ।। श्वेत रंग से सजी हो चहुं दीवारें । दरो-दीवार से आसमाँ को निहारें।। बुल्ली, जुल्म ना हो कोई घबराहट । कक्षा प्रवेश से खिले मुस्कुराहट।। श्यामपट्ट, चाक, डस्टर हों साथी । मिलवर्तन से सब रहें सहपाठी।। समय, सफाई और अनुशासन । मन की बात कह सकें संभाषण ।। आस-विश्वास की लौ जगी हो । मन-मस्तिष्क की आँख खुली हो ।। बच्चे शिक्षक की आँख के तारे । तीक्ष्ण दृष्टि से बदल जायें नज़ारे ।। मृदुल वाणी का जहाँ जय घोष हो। हंसी ठहाकों संग ज्ञान सदोष हो।। "पूर्णिमा" हर तरफ फूल हों बिखरे । आत्मिक ज्ञान से जीवन संवरे।। डॉ.पूर्णिमा (Dr.Purnima Rai) ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर , अमृतसर  अकादमिक सहायता समूह, पंजाब।