मेरी तन्हाई -हाल-चाल(भाग-24)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई -हाल-चाल(भाग-24) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब जब हम किसी को एक अरसे बाद मिलते हैं तो हमारा पहला प्रश्न होता है --आप कैसे हैं ?तो आगे से उनका जवाब यही आता है कि हम ठीक हैं !फिर वह हमारे परिवार का हाल-चाल पूछते हैं! बच्चों के बारे में पूछते हैं! आसपास के माहौल के बारे में बातें होती है! अगर कोई व्यक्ति जिसे हम मिलते हैं ,वह बीमार है तो हम उसको अपनी ही तरह से नए--नए ढंग तरीके बताने लग जाते हैं कि वह ठीक हो जाए। क्या ऐसा सोचना हमारा सही होता है? बीमार व्यक्ति तो अपनी बीमारी के बारे में बताता है। उसके मन का बोझ हल्का होता है, पर हम उसकी बीमारी के नए-नए ढंग बता कर क्या हम उसके बोझ को हल्का कर रहे होते हैं ?या उसको दबाव में लाकर अपनी बातें लागू करवा रहे होते हैं। हम कभी ऐसा नहीं सोचते। यह भी सोचने का प्रश्न है कि क्या किसी एक बीमारी का इलाज जब हम अपने तरीके से किसी को बताते हैं तो क्या जो फायदा हमें हुआ है या हमने किसी को फायदा होते सुना है, जिसको हम बता रहे हैं क्या उस व्यक्ति को भी उस बात का फायदा होता है। क्या ऐसा हमने महसूस किया है या सिर्फ हम अपनी बात ही कहना चाहते है...