मेरी तन्हाई --पार्सल (भाग-3)
मेरी तन्हाई --पार्सल (भाग-3) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब भावनाओं के बिना इंसान शून्य है। अगर भावनाएं ही न हो ,एहसास ही न हों तो मशीन और इंसान में कोई फर्क नहीं रह जाता। नींद न आने का कारण शायद यही है कि हम अपनी उम्मीदों से ज्यादा सपने देख लेते हैं, जो दैनिक जीवन में घटित होता है, उसकी अवांछित कल्पनाएं अपने मन में संजो लेते हैं ,जिस वजह से वह हलचल हमारे अंतर्मन को झकझोरती रहती है। अपनी दुनिया में डूबा हुआ मन बेचैन रहता है। जब उसका हकीकत से सामना होता है तो वह भावनाओं के कगार पर पहुँच कर भी अपने आपको मशीन सा बना हुआ महसूस करने लगता है। अचानक फोन की घंटी बजती है और आवाज़ आती है ।मैं अर्जुन बोल रहा हूँ ,आपका पार्सल आया है? शायद अर्जुन को यह नहीं पता कि उसकी फोन घंटी बजने पर जब मैं फोन की स्क्रीन पर उसका नाम ही देखती हूँ तो समझ जाती हूँ कि मेरा पार्सल आ गया है और मुझे अब एक ओटीपी देना है। आवाज देती हूँ और कहती हूँ, मैं तनिक छत पर हूँ, नीचे नहीं आ सकती। तुम घर के अंदर दरवाजे से पार्सल को फेंक दो, मैं तुम्हें ओटीपी दे देती हूँ और निश्चिंत सा हुआ अर्जुन अपने मोटरसाइकिल की रफ्तार आ...