ब्लॅड डोनर (लघुकथा) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
ब्लॅड डोनर (लघुकथा) डॉ. पूर्णिमा राय, पंजाब पोस्ट संख्या -82 आह! मुझे दर्द हो रहा है! मुझे लगता है, अब मैं नहीं बच पाऊँगा।मेरा इलाज कैसे हो पाएगा? ना तो मेरे पास कोई धन है और ना ही कोई इंश्योरेंस पॉलिसी और ना ही कोई मेरा ब्लॅड डोनर है जो मेरी मदद कर सके। मैंने जिंदगी भर अच्छे काम ही किए हैं,पर अधिक धन नहीं जुटा पाया हूँ। अब मैं क्या करूँ !कुछ समझ नहीं आ रहा, सड़क पर बेसुध खून से लथपथ सुरेश सोच रहा है!उसकी आंखें बंद है,धड़कन अभी चल रही है। उसके सीने में ताकत बची है,पर देह शिथिल हो चुकी है।इतने में कुछ लोग इर्द-गिर्द जमा हो जाते हैं।भीड़ को चीरता हुआएक युवक आगे आता है।वह युवक जल्दी से लगभग 36-37 साल के सुरेश को मजबूती से अपनी बाहों में जकड़ लेता है और कहता है," आपका बहुत खून बह चुका है! आपको खून की जरूरत पड़ेगी! वह पूरी निष्ठा से कहता है ,मुझे लगता है कि मेरा ब्लॅड ग्रुप आपसे मैच हो जाएगा ।एक दृढ़ विश्वास के साथ अपने आप में और बेसुध हुए सुरेश से बातें करता हुआ वह लोगों को कहता है ,चलिए !जल्दी चलिए !इनको मेरी गाड़ी तक ले जाने में मेरी मदद कीजिए! मैं इनका ब्लॅड...