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Showing posts from June, 2026

मेरी तन्हाई-- वापसी (भाग-30)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई-- वापसी (भाग-30) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब अवकाश के दिनों का पता ही नहीं चलता कि कब खत्म हो जाते हैं ।और कभी-कभी ऐसा लगता है कि अवकाश आता ही क्यों है ?समय बीते ही नहीं बिताया जाता है।  इस बार गर्मियों की छुट्टियां जब आई तो पता ही नहीं चला कि कैसे वक्त बीत गया और अब लग रहा है कि क्या आज अंतिम अवकाश का दिन है! सोच रही हूँ कि अवकाश का आनंद सिर्फ अपने मन पर निर्भर करता है। अपनी दिनचर्या से अलग जब हमें अवकाश मिलता है तो हमें काफी अच्छा महसूस होता है। अवकाश और दिनचर्या में फर्क बस इतना होता है कि हम दैनिक कार्यों से अलग होकर वह कार्य करते हैं जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा नहीं होता ।इसलिए हमें अवकाश का आनंद अधिक आता है।इस बार की छुट्टियों में एक भी पल ऐसा नहीं गुजरा जिसमें अपने लिए समय अर्थात खाली समय मिला हो। शिक्षा विभाग की ओर से मेरीटोरियस स्कूल में समर कैंप का आयोजन हुआ। छात्रों को नव तकनीक से शिक्षित किया गया।साथी ऐप पर छात्रों की ऑनलाइन कक्षाओं का कार्य चला। जनगणना संबंधी कार्य ,एस आई आर ,ड्रगस एंवं सोशल इकोनामिक्स जनगणना में अधिकारियों के ड्यूटी चली। ब्राइट माइ...

मेरी तन्हाई-- समय (भाग-29)डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब

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मेरी तन्हाई-- समय (भाग-29) डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब हे ईश्वर !हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है? हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? हम पर ही मुसीबत के पहाड़ क्यों टूट पड़ते हैं? बार-बार तुम हमारे ही घर पर गमों को दस्तक देने के लिए भेज देते हो ?आखिर ऐसा क्यों होता है? हम भी तो तेरे ही बनाए हुए इंसान है? हमारी भी रगों में  अन्य लोगों जैसा ही खून है ?हमने ऐसे कौन से पाप किए हैं ,जिनकी सजा तुम हमें दे रहे हो! एक मुसीबत खत्म नहीं होती ,दूसरी मुसीबत आ जाती है। इन सवालों के कटघरे में हम अपने मन के साथ-साथ अपने भगवान को भी जिस पर हमें विश्वास है, उस ईश्वर को भी कटघरे में खड़ा कर देते हैं। सवालों की जड़ी लगा देते हैं। पर हम शांत मन से सहजावस्था में चाहकर भी उस मुसीबत के दौर से  गुजर नहीं पाते हैं। वह समय बिताये नहीं बीतता है ।हर पल दु:खद एहसास होता रहता है ।यह सब हमारी मानसिक अवस्था एवं भावनात्मक स्तर पर निर्भर करता है ।जब हम दुनिया में इधर-उधर झांकते हैं,अपने स्व: के दुख से इतर इधर-उधर देखते हैं तो हमें आए दिन कोई ना कोई ऐसी दुर्घटना नजर आ जाती है, जिसके साथ साधारणीकरण होने पर हमे...

मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  गम की राहों पर चलना ज़रा होशियारी से, खुशियों के फूल खिलते हैं सिर्फ मेहनत से!! जब हम कोई उम्मीद नहीं रखते हैं तो कभी-कभी कुछ ऐसा होता है कि हमारे भीतर स्वत: ही और अधिक ऊर्जा का संचार होना आरंभ हो जाता है। आप सबके जीवन में आए दिन कोई ना कोई खुशी या गमी आती रहती होगी, क्योंकि यह जिंदगी है ।मैंने शायद पहले भी कहीं जिक्र किया होगा कि कोई भी कार्य जो हमने कभी ना किया हो जब हम पहली बार करते हैं तो उसका अनुभव कुछ अलग ही होता है।ऐसे ही मैंने जीवन में कसरत /व्यायाम/योगाभ्यास को कभी महत्व नहीं दिया। पर जब महत्व देने लगी तो अपने भीतर एक सुकून का अनुभव होने लगा। सहजावस्था आने लगी।अपने लिए तो हम अपने पैसे खर्च करके कुछ ना कुछ खरीदते ही रहते हैं या हम दूसरों के लिए भी कई बार कुछ खरीद कर दे देते हैं। कहते हैं जो मन में ठान लो वह आपको मिल जाएगा ।पर कुछ लोग जब कहते हैं कि हमने सोचा था, हमें वह मंजिल नहीं मिली ।तब मन का विचलित होना आवश्यक है।बात चाहे आपको छोटी लगी पर मुझे आपको बताते हुए अच्छा महसूस हो रहा है। मैंनें फरवरी में फ्री ऑ...

मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब जिंदगी बहुत ही अजीब है ।एक पल में गम के बादल आ जाते हैं तो दूसरे पल में सुख की घटाएं भी दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं‌। लोग कहते हैं कि बादल छा गए हैं ,काली घटाएं आ रही है  पर बादलों के बीच में से चमकती हुई बिजली की तरह सफेद रंग की लकीरें हैं ,वह भी जिंदगी जीने की उम्मीद जगा देती हैं।बस ऐसा ही कुछ आजकल मेरे साथ चल रहा है ।कभी खुशियाँ इतनी आ रही है कि समेट नहीं पा रही और कभी आंँखों से बरसात होने लगती है।कभी दिल पिघल कर मोम जैसा बन जाता है । तो कभी चट्टान जैसा पत्थर दिल हो जाता है।कभी सोचती हूँ कि जिंदगी इम्तिहान ले रही है, परीक्षाएं ले रही है ,क्या मैं उन परीक्षाओं में पास हो पाऊँगी ?बस इसी उधेड़बुन में जिंदगी बीत रही है। छोटी-छोटी खुशियों को बटोरती हुई जिंदगी आगे बढ़ती चली जा रही है ।आज ब्राइट माइंड पंजाब -2026 का प्रोग्राम गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में दशमेश ऑडिटोरियम में हुआ ।जिसमें शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस जी ,मनीष सिसोदिया जी, डायरेक्टर पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग सकत्तर  सिंह बल जी एवं अन्य उच्च ...

मेरी तन्हाई--गहरी नींद (भाग-26)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--गहरी नींद (भाग-26) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब रात को गहरी नींद में सोने से पहले सुबह की योजना के बारे में जानने की इच्छा लिए हुए अचेत मन सो जाता है ।सुबह की योजना से बेखबर मन यही सोचता है कि अब शायद कुछ नहीं हो सकता ।अब कल जो होगा देखा जाएगा। बस यही सोचकर हमारा मन रात को गहन निद्रा में सो जाता है। एक समय था ।जब हम लोग खत लिखते थे, तार भेजते थे तो दो-तीन दिन बाद वह खत मिलता था ।कई बार वह काफी-काफी दिनों बाद मिलता था और हमें सूचना मिलती थी। हमें फिर पता चलता था कि कोई प्रोग्राम होने जा रहा है। आजकल ऑनलाइन का जमाना है। व्हाट्सएप का जमाना आ गया है तो व्हाट्सएप के माध्यम से हमें योजनाओं को बनाने और उन्हें लागू करने में बिल्कुल भी ज्यादा समय नहीं लगता है और सूचना शीघ्र ही भेज दी जाती है। ऐसे ही रात को गहन निद्रा में सोई हुई मैं यह सोचती रही कि कल का कोई प्रोग्राम शायद नहीं होगा। बस इतना सा पता है कि एक मीटिंग होनी है तो मीटिंग का कोई स्थान पता न होने की वजह से बेचैन मन गहन निद्रा में सो जाता है ।आप समझ सकते हैं जब इंसान सो जाता है तो फिर भूल जाता है कि सुबह जो होगा देखा...

मेरी तन्हाई: संकेत भाषा (भाग-25)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई: संकेत भाषा (भाग-25) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब दोस्तो! हमारी भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत बहुत विशाल एवं संपन्न है ।भारतीय परंपराओं को जीवित रखने के लिए हमें बार-बार इन चीजों को दोहराने की आवश्यकता नहीं होती। भारतीय विरासत जिंदा रहे, यही दुआएं रहती हैं।उसके लिए हमें जैसे-जैसे समय बीत रहा है वैसे-वैसे हमें भावी पीढ़ी को उसके प्रति सचेत और जागरूक करने की आवश्यकता होती है। हमारे पूर्वजों ने तथा बड़े-बुजुर्गों ने जो देखा है ,उनके जो अनुभव है वह एक तरह की भारतीय विरासत और परंपरा ही है ।अगर हम अपने बड़े-बुजुर्गों के बताए हुए रास्तों को अपनाकर ही आज जीवनयापन करते हैं तो आज के समय में इस वातावरण के अनुसार जीवन जीना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए आवश्यक है कि हमें अपने बुजुर्गों के बताए हुए अनुभवों को एवं अपनी विरासत को साथ लेकर चलना होगा। पारंपरिक जीवन को वर्तमान के साथ तालमेल बिठाकर जिंदगी जीना आवश्यक है। यह तभी हो सकता है जब हमारे भीतर सुनने की क्षमता हो, हमारे भीतर ठहराव हो, हम अपने भीतर से मैं-मेरी की भावना को समाप्त कर पाएं, तभी हम आगे आज के समय में सुखी और खुशह...

मेरी तन्हाई -हाल-चाल(भाग-24)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई -हाल-चाल(भाग-24) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब जब हम किसी को एक अरसे बाद मिलते हैं तो हमारा पहला प्रश्न होता है --आप कैसे हैं ?तो आगे से उनका जवाब यही आता है कि हम ठीक हैं !फिर वह हमारे परिवार का हाल-चाल पूछते हैं! बच्चों के बारे में पूछते हैं! आसपास के माहौल के बारे में बातें होती है! अगर कोई व्यक्ति जिसे हम मिलते हैं ,वह बीमार है तो हम उसको अपनी ही तरह से नए--नए ढंग तरीके बताने लग जाते हैं कि वह ठीक हो जाए। क्या ऐसा सोचना हमारा सही होता है? बीमार व्यक्ति तो अपनी बीमारी के बारे में बताता है। उसके मन का बोझ हल्का होता है, पर हम उसकी बीमारी के नए-नए ढंग बता कर क्या हम उसके बोझ को हल्का कर रहे होते हैं ?या उसको दबाव में लाकर अपनी बातें लागू करवा रहे होते हैं। हम कभी ऐसा नहीं सोचते। यह भी सोचने का प्रश्न है कि क्या किसी एक बीमारी का इलाज जब हम अपने तरीके से किसी को बताते हैं तो क्या जो फायदा हमें हुआ है या हमने किसी को फायदा होते सुना है, जिसको हम बता रहे हैं क्या उस व्यक्ति को भी उस बात का फायदा होता है। क्या ऐसा हमने महसूस किया है या सिर्फ हम अपनी बात ही कहना चाहते है...

मेरी तन्हाई--प्यार (भाग-23)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--प्यार (भाग-23) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब प्यार एक ऐसा एहसास है जिसे ना तो शब्दों में ब्यां किया जा सकता है, ना ही इसे किसी बंदिश में बांधा जा सकता है ।शक के दायरे से यह बहुत दूर होता है जिसे प्यार का सही मायने समझ आ जाए वही किसी को प्यार कर सकता है।किसी को प्यार करो पर मोह ना करो।प्यार सब कुछ त्यागना जानता है और मोह में इंसान सिर्फ पाने की चाहत रखता है। किसी की अत्यधिक परवाह करना प्यार के अंतर्गत आता है।किसी को जुनून की हद से चाहना यह भी प्यार है। किसी को सिर्फ अपना बनाने की जिद्द करना और उसे हासिल ना कर पाने की चाहत में अपने आप को नुकसान पहुँचाना या जिसको हम प्रेम करते हैं उसको नुकसान पहुँचाना यह प्यार  नहीं है। यह महज एक जुनून होता है। प्यार तो निस्वार्थ है जिसमें किसी भी स्वार्थ की भावना की गुंजाइश नहीं होती। किसी की छोटी-छोटी जरूरत को पूरा करना, किसी के लिए हर वक्त जरूरत पड़ने पर साथ देना यह प्यार का अभिन्न अंग है पर बदले में कुछ हासिल करने की उम्मीद प्यार नहीं महज़ मोह है। इसी मोह को प्यार का नाम दे देना आज के समय में अत्यधिक प्रचलन में आ गया है। तभी तो...

मेरी तन्हाई--प्रकृति (भाग-22)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--प्रकृति (भाग-22) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता है। पंचतत्व निर्मित मानव भी प्रकृति का ही अंग है। प्रकृति और मानव एक दूसरे के पूरक हैं। जून के महीने में बारिश का आना बदलते हुए मौसम और वातावरण की मुँह बोलती तस्वीर है।जैसे ही बारिश आती है तो मन में विचार आता है कि बारिश में तन भीगे पर मन भीगना नहीं चाहिए। इस भाव और विचार का अभिप्राय हर एक व्यक्ति अपने नजरिए से देखेगा। जिसके मन की अवस्था दूसरों के प्रति चिंतित भावना की है, दूसरों के लिए वह सोच रहा है तो वह सोचेगा कहीं इस बारिश से किसी ऐसे व्यक्ति का नुकसान ना हो जाए जिसको बाद में मुश्किल का सामना करना पड़े। जिस व्यक्ति की अवस्था खुश है, खुशहाल जीवन है ,जिसके पास प्यार करने वाले लोग हैं ,वह व्यक्ति यही सोचेगा कि मैं अपने किसी प्रिय जन के साथ इस बारिश का आनंद लूँ। यह अपनी-अपने मन की अवस्थाओं पर निर्भर करता है कि हम किसी भी बदलाव को किस प्रकार स्वीकार करते हैं।प्रकृति के साथ खिलवाड़ होता है तो मानव का भस्म होना और इस सृष्टि का विकास अवरूद्ध हो जाना संभव है।अगर मानव के भीतर से ...

मेरी तन्हाई : प्रेरणा: सुमेल दिवस (21जून विशेष)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई : प्रेरणा: सुमेल दिवस (21जून विशेष) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। एक ऐसा सुमेल दिवस जहाँं, हम अपने तन-मन का सामंजस्य बिठा पायें। व्यायाम करना कसरत करना हमारे शरीर का एक आवश्यक तत्व है। जैसे पांच तत्वों से हमारा शरीर बना है इस तरह योग को भी मैं एक आवश्यक तत्व मानने लगी हूँ। जिसकी तरफ हमारा कभी ध्यान ही नहीं जाता है। शायद मैं भी आपकी तरह ही थी ।कभी जीवन में सैर करना, कसरत करना, व्यायाम करना इसके लिए समय ही नहीं निकाल पाती थी और लगता था कि इसकी मुझे जरूरत भी नहीं थी। इतनी भाग दौड़ भरी जिंदगी बचपन से ही थी जिस वजह से लगता था कि हम ऐसे ही स्वस्थ हैं और सच कहूँ तो मैं अपने बचपन एवं युवावस्था तक  भी स्वस्थ ही रही ।जब हम एक सकारात्मक सोच के साथ जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं तब गरीबी भी हो ,धन का अभाव भी हो पर आपके घर के भीतर सकारात्मकता का संचार  हो तो आप कभी भी अपने आप को अस्वस्थ महसूस नहीं करते हैं। आज की जीवन शैली में बदलाव होने की वजह से ,तकनीकी युग आ जाने की वजह से और वातावरण में धुंधलापन आ जाने से हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने की ...

मेरी तन्हाई--ऊर्जा (भाग-20)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--ऊर्जा (भाग-20) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब आजकल सुबह‌-शाम  हर वक्त कुदरत की तरफ ही ध्यान जाता है ।कुदरत के स्रोत पानी, हवा, धूप ,मिट्टी, पेड़-पौधे उनकी तरफ ही मन लगा रहता है। कभी पानी व्यर्थ नहीं करना है, कभी प्लास्टिक के प्रयोग से खुद को एवं औरों को भी बचाना है ।प्लास्टिक की बोतल इधर-उधर नहीं फेंकनी है। कभी ध्यान आता है कि कोई बेकार चीज का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है? बस इन्हीं छोटे-छोटे चीजों की तरफ ध्यान आकर्षित होता रहता है ।कभी  पौधों को देखती रहती हूँ।कभी पौधों की कटिंग लगाकर नए पौधे उगा रही हूँ ताकि ताज़ी हवा मिल सके ।आजकल आबो-हवा बहुत खराब हो चुकी है ।ऑक्सीजन की कमी हो रही है तो हमें अपने आसपास इनडोर ,आउटडोर प्लांट लगाते रहना चाहिए। मैंने आज ही टर्टल वाइन और पर्पल हार्ट प्लांट को दोबारा से एक और  नया प्लांट बनाया है। पहले भी इन पौधों को मैं पानी में उगा चुकी हूँ। अब मैं आज छोटी-छोटी पानी की बोतल  में इनको लगाया है और मुझे उम्मीद है कि जिस ऊर्जा के साथ आप कुछ नया कार्य करते हैं तो वह ऊर्जा  हमें दूसरों में भी ट्रांसफर करनी चाहिए। दू...

मेरी तन्हाई--तीसरा पहर ( भाग-19)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--तीसरा पहर  ( भाग-19) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब बिजली के गुल होने की असुविधा हर किसी को खलती है पर तब अधिक खलती है जब समय रात का हो। रात के समय बिजली कभी आ रही थी। कभी जा रही थी ।कभी एयर कंडीशनर ऑन होता था, कभी  बंद हो जाता था। इसी चक्कर में कभी स्विच ऑन हो रहा था, कभी स्विच ऑफ कर रही थी। यह सोचकर कि कहीं लाइट एकदम से अधिक आ गई तो कोई नुक्सान न हो जाए ।बस ऐसे ही करते-करते रात का तीसरा पहर आ गया था। कुछ समय बाद पंखे की हवा से ही धीरे धीरे नींद आ गई। सुबह जब उठी तो एक कप चाय के प्याले की तलब हुई । वैसे दिनचर्या में मैं सुबह की चाय अधिकतर नहीं लेती हूँ।उससे पहले शीशे के पास गई और अपने आप को देखकर कहने लगी, मैं ठीक हूँ, मैं स्वस्थ हूँ, मुझे कुछ नहीं हुआ है। पर रात को गर्दन के पास कुछ हल्का सा खराश हो रहा था। शायद किसी चींटी ने काट लिया होगा, पर जब बिस्तर पर देखा तो कुछ भी नहीं था।  उसका हल्का-हल्का निशान गर्दन पर नजर आ रहा था, फिर सोचा कोई बात नहीं यह तो मामूली सी खराश है, ठीक हो जाएगी। फिर किचन में जाती हूँ चाय बनाने के लिये। चाय को बनाकर प्याले में डाल...

मेरी तन्हाई--सुकून (भाग-18)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--सुकून (भाग-18) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब सुबह-सुबह जल्दी उठकर कुदरत का आनंद लेना, पेड़ों की हसीन खिलती हुई टहनियों में गुम हो जाना, राह में मिलते हुए मुसाफिरों को देखकर प्रसन्नचित हो जाना ,आसपास का शांत वातावरण और पास से गुजरती हुई मोटर गाड़ियों की मद्दिम आवाज़ पल भर के लिए आपको आपके अस्तित्व से थोड़ा दूर ले जाती है ।एक ऐसे सुकून की ओर जो आपने कभी अकेले में रहकर भी महसूस ना किया हो ।अक्सर लोग सोचते हैं कि अकेले रहने में ही आनंद है ।अगर हम कुछ समय के लिए अकेले रह लेंगे तो शायद हमें एक आनंद की अनुभूति होगी। हमारा दिमाग व  हमारा दिल शांत हो जाएगा। पर मुझे लगता है कि ऐसा नहीं है। हम इंसानों से दूर होकर महसूस करते हैं कि हम अकेले हो गए हैं।घर में अगर सास ज्यादा अधिक बात करती है तो बहू उससे दूर होकर अकेलेपन का अनुभव करना चाहती है। अगर पति-पत्नी में कहीं झगड़ा हो रहा है तो वह दोनों एक दूसरे से दूर होकर कुछ समय के लिए अकेले रहने का आनंद लेना चाहते हैं। बच्चों को अगर माता-पिता अधिक डांटते हैं तो बच्चे भी उनसे दूर होकर अकेले होकर रहना चाहते हैं । दरअसल किसी को भी यह बा...

मेरी तन्हाई--नया सूर्य (भाग-17)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--नया सूर्य (भाग-17) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  सभी कहते हैं कि हर दिन एक नया दिन होता है। हर शाम हसीन होती है और हर रात में अंधेरे को चीरने की एक अलग एक क्षमता होती है,जो नए सूर्य का आगमन करती है। हर व्यक्ति हर सवेरे नए सूर्य की तलाश में है। गहरी रात के पश्चात निकला सूर्य हर सांस में एक उम्मीद का सिलसिला पैदा करता है।हर व्यक्ति जीवन में किसी न किसी लक्ष्य को आगे लेकर बढ़ रहा है। रात की गहरी चादर के पश्चात जब सूर्य की पहली किरण निकलती है तो उस किरण को देखने का नज़रिया जिस व्यक्ति के पास है।वह व्यक्ति सफलता के शिखर पर पहुंच ही जाता है।हर व्यक्ति के जीवन का कोई न कोई लक्ष्य है, मंजिल है।यह अच्छी बात है कि जीवन में किसी मंजिल का होना, किसी लक्ष्य का होना बहुत ही महत्वपूर्ण है ।स्थिरता जहाँ आ जाती है, वहाँ प्रगति रुक जाती है। निरंतर चलते रहने का नाम ही जिंदगी है। कई बार हम लोग अपनी-अपनी व्यस्तताओं से अपने बनाये हुए दायरे में बंधी हुई जिंदगी जी रहे होते हैं ।हमें लगता है इससे अलग कोई जिंदगी ही नहीं है ,पर जब हम बाहर निकल कर देखते हैं। अपने दायरे की सीमाओं से थोड़ा स...

मेरी तन्हाई-- होमवर्क (भाग-16)डॉ.पूर्णिमा राय , पंजाब

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मेरी तन्हाई-- होमवर्क (भाग-16) डॉ.पूर्णिमा राय , पंजाब एक वक्त था, जब झूठ बोला जाता था तो आपकी आँखें और आपका चेहरा सब सच उगल देता था। जितना भी सच छुपाना चाहें,आप पकड़े जाते थे। आप झूठ का नकाब पहन कर सच को छुपा नहीं सकते थे। एक बार तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली अनन्या  से मुझे मिलने का मौका मिला ।वह अपना होमवर्क कर रही थी ।बड़े प्यार से किताबों की दुनिया में गुम हुई अनन्या  निरंतर कभी किसी कॉपी को निकाल कर,कभी किताब को निकाल कर अपना होमवर्क करने में लगी हुई थी। जैसे ही मैंने उसकी हिंदी की कॉपी देखी । बहुत ही सुंदर लिखावट थी।  हिंदी की शिक्षिका होने के नाते मेरा ध्यान त्रुटियों की ओर चला गया। मुझे त्रुटियाँ नजर आ गई ।जैसे-जैसे पेज़ आगे पलटती जा रही थी ,कहीं ना कहीं कोई त्रुटि दिख जा रही थी। मैंने प्यार से पूछ लिया ,"क्या !तुम्हारी शिक्षिका गलतियाँ नहीं निकलती !अरे निकालती है ना सब! मैं ठीक ही लिखती हूँ। मेरी कोई गलती ही नहीं निकलती है। उसकी मंद-मंद प्यारी मुस्कान से बाल मन की अवस्था और शिक्षिका के प्रति स्नेह साफ दिखाई दे रहा था।मैंने कहा, अच्छा! तुम तो फिर बहुत ...

ब्लॅड डोनर (लघुकथा) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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ब्लॅड डोनर (लघुकथा) डॉ. पूर्णिमा राय, पंजाब  पोस्ट संख्या -82 आह! मुझे दर्द हो रहा है! मुझे लगता है, अब मैं नहीं बच पाऊँगा।मेरा इलाज कैसे हो पाएगा? ना तो मेरे पास कोई धन है और ना ही कोई इंश्योरेंस पॉलिसी और ना ही कोई मेरा ब्लॅड डोनर है जो मेरी मदद कर सके। मैंने जिंदगी भर अच्छे काम ही किए हैं,पर अधिक धन नहीं जुटा पाया हूँ। अब मैं क्या करूँ !कुछ समझ नहीं आ रहा, सड़क पर बेसुध खून से लथपथ सुरेश सोच रहा है!उसकी आंखें बंद है,धड़कन अभी चल रही है। उसके सीने में ताकत बची है,पर देह शिथिल हो चुकी है।इतने में कुछ लोग इर्द-गिर्द जमा हो जाते हैं।भीड़ को चीरता हुआएक  युवक आगे आता है।वह युवक जल्दी से लगभग 36-37 साल के सुरेश को  मजबूती से अपनी बाहों में जकड़ लेता है और कहता है," आपका बहुत खून बह चुका है! आपको खून की जरूरत पड़ेगी! वह पूरी निष्ठा से कहता है ,मुझे लगता है कि मेरा ब्लॅड ग्रुप आपसे मैच हो जाएगा ।एक दृढ़ विश्वास के साथ अपने आप में और बेसुध हुए सुरेश से बातें करता हुआ वह लोगों को कहता है ,चलिए !जल्दी चलिए !इनको मेरी गाड़ी तक ले जाने में मेरी मदद कीजिए! मैं इनका ब्लॅड...

मेरी तन्हाई- शहजा़दी (भाग-15)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई- शहजा़दी (भाग-15) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब कॉपी के कागज को डिज़ाइनर अंदाज में और उस पर लिखे हुए चंद वाक्य पढ़कर आँखें तरल हो गई। विगत दिनों की स्मृतियाँ वर्तमान को अपने बहाव में बहा कर ले गईं। याद है मुझे वह दिन साल 2014 फरवरी का महीना था ।वैलेंटाइन डे था ।सब लोग अपने प्यार का इज़हार करते हैं। प्यार करना गलत नहीं है ।प्यार का एहसास और भी अधिक गहरा हो जाता है, जब प्यार में निस्वार्थ भाव होता है। कहते हैं माँ बनना हर औरत का सपना होता है। प्रसव पीड़ा सहन करना हर किसी के हिस्से में नहीं आता। माँ की ममता और वात्सल्य का अहसास तब दोगुना हो जाता है जब हम किसी बेटी की माँ बनते हैं। नन्हें- नन्हें हाथों का स्पर्श ऐसे लगता है, जैसे हम उसमें  अपना बचपन जी रहे हैं। आवाज आती है-- "हैप्पी वैलेंटाइन डे" मम्मी! मैं हैरान हो जाती हूँ ।मैं उसको सदैव प्रेरित करते हुए कहती हूँ कि तुम भी  कुछ लिखा करो। तुम्हें लिखने का शौक होना चाहिए। तुम अपने मन की बातें कागज पर लिख लिया करो,इससे अच्छा महसूस होता है। मेरी बात सुनकर वह भी कभी-कभी अपनी डायरी खोल लेती थी।जिस भी काग़ज पर कुछ लि...

मेरी तन्हाई--एक लिफाफा (भाग-14)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--एक लिफाफा (भाग-14) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब खूबसूरत होना लाज़मी नहीं है ।खूबसूरती को सजा कर रखना एक कला है। हर वह चीज खूबसूरत है जिसके साथ खट्टी-मीठी यादें जुड़ी होती है ।हम यह नहीं कह सकते कि कोई याद बुरी है तो उसके अहसास भी बुरे होंगे क्योंकि बुरे अहसास से भरी यादें भी कई बार हमें कुछ ऐसे सबक दे जाती हैं जिनके अहसास हमें बाद में मीठा लगने लगता है। बस यूं ही इधर-उधर की बातों में गुमसुम कभी किसी नुक्कड़ की तरफ ध्यान जाता है तो कभी किसी स्टोर रूम की तरफ ।कभी पुरानी यादों में मन बह जाता है तो कभी वर्तमान में जीने की उम्मीद जाग उठती है। अपने ख्यालों में डूबना सबको अच्छा लगता है पर आजकल  ख्यालों में डूबे रहने का वक्त हर एक के पास नहीं है। जिंदगी इतनी अधिक बोझिल हो चुकी है कि हर एक व्यक्ति संतुष्टि चाहता है। जिसके पास जिस चीज की कमी होती है ,उसका ध्यान उस चीज की और ज्यादा अधिक जाता है ।पर जो पास में है उसका ध्यान नहीं हो पाता है। पास में जो है उसको सहेज कर रखना बहुत ही मुश्किल कार्य लगता है । पर मुझे आज भी याद है वह दिन जिसे मैं कभी नहीं भूल पाती हूँ। वह यादें ...

मेरी तन्हाई-आँधी-तूफान (भाग-13)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई-आँधी-तूफान (भाग-13) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब आँधी तूफान, कड़कती बिजली, गरज़ते बादल ,उड़ते धूलकण, तेज बारिश की बूंदों के साथ सब इधर-उधर बिखरा हुआ दिख रहा था ।राहगीरों को भी मुश्किल हो गई थी ।यहाँ तक कि दुकानों का सामान भी इधर-उधर भाग-दौड़ कर रहा था। कुछ लोग आँधी को  चीरते हुए अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे और कुछ तेज़ आंधी में तेज़ तूफान में अपने आप को बचाने का प्रयास कर रहे थे फिर भी वह सड़क पर लुढ़क जाते हैं। लुढ़क गए इंसान के साथ-साथ कुदरत का भीषण रूप दीखता है।  पेड़-पौधे ,वृक्ष चहुं ओर रास्तों में बिखर गए ।कहीं रास्तों पर जाम लग गया और कहीं कुदरत ने आकर लोगों को रोक दिया। रुकने के लिए मजबूर कर दिया ।गर्मी की तपिश से तो आराम मिला था पर जो आँधी आई ,तूफान आया, बिजली कौंधी एवं बारिश हुई, उस वजह से न जाने कितने घरों की छतें उड़ गई। कितने लोग घर से बेघर हो गए ।कुछ लोगों का सामान टूट गया। कुछ लोगों के छप्पर उड़ गए, पर जो लोग कारों से जा रहे थे, वे उस बारिश का आनंद ले रहे थे ।उनको उस आँधी का, तूफान का ,बारिश का बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था ।जैसा मुझे लग रहा ...

बहाव (कविता )

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बहाव  पोस्ट संख्या -81 तुम लिखते हो  या कलम के साथ बहते हो पानी सा बहाव संग रखते हो! किसी लौकिक जगत  की कल्पना में हो  या किसी दैवीय शक्ति की कल्पना करते हो!  जो तुम हाड़-माँस के पुतले में भी  एक अप्रतिम देवी के दर्शन करते हो!! अजीब है तुम्हारी दृष्टि और अवलोकन का ढंग   कैसे तुम इतनी गहनता में जाकर   भीतर का मन पढ़ लेते हो  और सामने आए बिना ही तुम  चुपचाप  निहारते हो!! तुम्हारी गलती भी   एक सच्ची सी भूल लगती है!! तुम्हारे हृदय में भरा हुआ  असीम स्नेह लगती है  फूलों के साथ  शूलों की चुभन भी मीठी लगती है!! कितनी सादगी से   प्रशंसा कर दी तुमने जिसकी भी   वह इस संसार में लाजवाब लगती है! पूर्णिमा!वह तुम्हारे सपनों का   एक हसीन ख्वाब लगती है! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

मेरी तन्हाई---संवेदना (भाग-12)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई---संवेदना (भाग-12) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब कूकर की सीटी बज रही है! जी हां,ठीक सुना आपने! पर यह कूकर की सीटी मेरे घर पर नहीं, आस-पड़ोस के किसी घर से आवाज़ आ रही है। दोपहर का समय है तो कुछ ना कुछ तो किसी के घर में पक रहा होगा ।शायद खिचड़ी ,खुद में हँसती हूँ। खिचड़ी का नाम इसलिए लेती हूँ क्योंकि आज मेरे पेट में हल्का-हल्का दर्द हो रहा है और जिससे मुझे कुछ भी खाने का मन नहीं हो रहा और यही लग रहा है कि कोई भी कुछ पका रहा है तो शायद खिचड़ी ही बना रहा होगा। फिर मेरी कल्पना दूसरी ओर अंगड़ाई लेती है -शायद चने, शायद राजमां या शायद कुछ...और--- और यह शायद ही है जो हमारे मन में हमेशा बना रहता है ।इतने में गली में आवाज़ आती है आलू ले लो, सब्जी ले लो, बैंगन ले लो, समझ नहीं आता ।कभी-कभी उसकी आवाज़ में इतना आक्रोश सुनाई देता है और कभी-कभी सब्जी वाले की आवाज में मिठास सुनाई देती है। कभी वह इतनी भाग-दौड़ में होता है कि आवाज़ ही नहीं सुन पाती और वह गली के दूसरे छोर पर पहुँच जाता है और हम लोग बिना सब्जी लिए ही रह जाते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि वह शायद गली में सिर्फ फेरी लगाने...

मेरी तन्हाई---सलीका (भाग-11)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई---सलीका (भाग-11) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब प्रेरणा सदैव प्रगति की प्रतीक है। तभी तो कहते हैं कि आपके जीवन में प्रेरक लोगों का होना बहुत ही जरुरी है जो आपको प्रेरित कर सकें। आपके मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर सके । आज जब सुबह उठी तो स्वास्थ्य काफी अच्छा महसूस कर रहा था।आज मन हुआ कि चलो थोड़ा किचन की ही देखभाल कर ली जाए। किचन में वैसे तो हम लोग खाने-पीने के लिए ही जाते हैं और बहुत कम ऐसा होता है कि किचन के कॉर्नर की सफाई की जाए ।चीजों को इधर--उधर करके देखा जाए ।फालतू चीजों को बाहर निकाला जाए । वैसे भी नौकरी की भागदौड़ में समय ही नहीं मिलता है कि हम रूटीन से हटकर कार्य कर पाएं।यह सब काम तभी हो पाते हैं, जब आपका मन सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है और जब आलस आपसे कोसों दूर हो जाता है ।ऐसे ही आज अपनी मस्ती में सुबह उठकर जल्दी से चाय के साथ रस लिया और अपनी रूटीन की दवाई खाई।फिर किचन का साफ-सफाई का कार्य करने लग गई।सोचा धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा करके साफ-सफाई करती हूँ। अपनी ही मस्ती में कभी पानी में हाथ धो रही हूँ। कभी किसी बर्तन को साफ कर रही हूँ। कभी किचन के बॉक्स को साफ कर रह...