मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27)
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
जिंदगी बहुत ही अजीब है ।एक पल में गम के बादल आ जाते हैं तो दूसरे पल में सुख की घटाएं भी दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं। लोग कहते हैं कि बादल छा गए हैं ,काली घटाएं आ रही है पर बादलों के बीच में से चमकती हुई बिजली की तरह सफेद रंग की लकीरें हैं ,वह भी जिंदगी जीने की उम्मीद जगा देती हैं।बस ऐसा ही कुछ आजकल मेरे साथ चल रहा है ।कभी खुशियाँ इतनी आ रही है कि समेट नहीं पा रही और कभी आंँखों से बरसात होने लगती है।कभी दिल पिघल कर मोम जैसा बन जाता है । तो कभी चट्टान जैसा पत्थर दिल हो जाता है।कभी सोचती हूँ कि जिंदगी इम्तिहान ले रही है, परीक्षाएं ले रही है ,क्या मैं उन परीक्षाओं में पास हो पाऊँगी ?बस इसी उधेड़बुन में जिंदगी बीत रही है। छोटी-छोटी खुशियों को बटोरती हुई जिंदगी आगे बढ़ती चली जा रही है ।आज ब्राइट माइंड पंजाब -2026 का प्रोग्राम गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में दशमेश ऑडिटोरियम में हुआ ।जिसमें शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस जी ,मनीष सिसोदिया जी, डायरेक्टर पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग सकत्तर सिंह बल जी एवं अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित थे, वहाँ जाने का मुझे भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। सरकारी स्कूलों के ब्राइट माईंड छात्रों के विचारों को जानने का मौका मिला। वहाँ जब छात्र बात कर रहे थे, तोअपने बचपन की बातें याद आ जाती हैं कि हम भी जब कभी पढ़ते थे तो हमें कभी प्रिंसीपल के पास जाने का मौका ही मिल जाए तो हमारे लिए वह बहुत बड़ी बात होती थी और आज के छात्र इतने खुशकिस्मत है कि उन्हें शिक्षा मंत्री के रू-ब-रू बात करने का मौका मिल रहा है। पर बात वही है कि हम समय को संभालते कैसे हैं ?वहां पर छात्र अपने मन की अवस्था को बता रहे थे । सरकारी स्कूलों में आ रहे परिवर्तन ,शिक्षा क्रांति का जिक्र कर रहे थे ।कुछेक छात्राओं ने मानसिकप्रेशर की बात की, छात्र भावुक भी हो रहे थे, पर जब तक हम अपनी भावुकता पर कंट्रोल नहीं करेंगे, भावनात्मक स्तर पर अपने आप को मजबूत नहीं कर पाएंगे, तब तक हम खुद के साथ देश को आगे नहीं ले जा पाएंगे। अगर हमें अपने देश को आगे लेकर जाना होगा तो हमें भावनात्मक स्तर पर स्वयं के साथ-साथ अपने साथी दोस्तों को भी भावनात्मक स्तर पर मजबूत बनाना होगा ।एक चींटी भी बार-बार जब दीवार पर चढ़ती है ,सौ बार गिरती है, फिसलती है ,फिर चढ़ती है। एक मकड़ी भी बार-बार जाला बुनती है ।अंत में वह कामयाब हो जाती है। आज छात्रों को भी किसी एक इम्तिहान में पास न होने पर अपने मन को व्यथित नहीं करना होगा ,उन्हें अपना इरादा मजबूत रखना होगा ।जिंदगी इतनी आसान नहीं है, जिंदगी इतनी मुश्किल से मिलती है ।"मानव जन्म दुर्लभ है देह न बारंबार" दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी कहा है। फिर भी हम इस मानव जन्म में आकर मानव जामा पहन कर हम अपने आप को कमजोर समझ लेते हैं। हमें किसी भी हालत में अपने आप को कमजोर नहीं बनाना है। हमें सदैव अपने आप को भावनात्मक स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा के साथ मजबूत बनाना है। प्रोग्राम के दौरान जो विचार मेरे मन में घूम रहे थे उन विचारो को मैंने आपके सामने रख दिया।इसी दौरान तस्वीरों के आदान-प्रदान का सिलसिला चल रहा था जो तस्वीर कैमरे में थी, अब जिनकी थी, उनको तो देनी ही थी ना!! वह तस्वीर इधर-उधर कर रही थी! बस ऐसे ही करते-करते फेसबुक को खोल लिया और फेसबुक पर जैसे ही एक समाचार आया कि आपकी पुस्तक का दूसरा एडिशन प्रकाशित हो रहा है।हैरान करने वाला पोस्ट था।2016 में मेरा पहला काव्य-संग्रह "ओस की बूँदें "छपा था और जब मैंनें यह समाचार देखा कि यह पोस्ट प्रकाशक की ओर से था। मुझे अति प्रसन्नता हुई ।थोड़ी सी मैं भावुक हो गई क्योंकि इस पुस्तक की मेरे पास मात्र एक ही प्रति बची हुई थी और जब मैंनें इसका दूसरा एडिशन देखा और कवर पेज देखा तो मुझे अति प्रसन्नता हुई। मैं और अधिक सकारात्मक ऊर्जा से भर गई ।बस यही चाहती हूँ कि जिंदगी में सरलता बनी रहे। स्वभाव में सहजता बनी रहे। जिसे भी मिलूँ, अपने सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान करती रहूँ। दूसरों की सकारात्मक ऊर्जा से अपने जीवन को संवारती रहूँ।
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
जिंदगी बहुत ही अजीब है ।एक पल में गम के बादल आ जाते हैं तो दूसरे पल में सुख की घटाएं भी दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं। लोग कहते हैं कि बादल छा गए हैं ,काली घटाएं आ रही है पर बादलों के बीच में से चमकती हुई बिजली की तरह सफेद रंग की लकीरें हैं ,वह भी जिंदगी जीने की उम्मीद जगा देती हैं।बस ऐसा ही कुछ आजकल मेरे साथ चल रहा है ।कभी खुशियाँ इतनी आ रही है कि समेट नहीं पा रही और कभी आंँखों से बरसात होने लगती है।कभी दिल पिघल कर मोम जैसा बन जाता है । तो कभी चट्टान जैसा पत्थर दिल हो जाता है।कभी सोचती हूँ कि जिंदगी इम्तिहान ले रही है, परीक्षाएं ले रही है ,क्या मैं उन परीक्षाओं में पास हो पाऊँगी ?बस इसी उधेड़बुन में जिंदगी बीत रही है। छोटी-छोटी खुशियों को बटोरती हुई जिंदगी आगे बढ़ती चली जा रही है ।आज ब्राइट माइंड पंजाब -2026 का प्रोग्राम गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में दशमेश ऑडिटोरियम में हुआ ।जिसमें शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस जी ,मनीष सिसोदिया जी, डायरेक्टर पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग सकत्तर सिंह बल जी एवं अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित थे, वहाँ जाने का मुझे भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। सरकारी स्कूलों के ब्राइट माईंड छात्रों के विचारों को जानने का मौका मिला। वहाँ जब छात्र बात कर रहे थे, तोअपने बचपन की बातें याद आ जाती हैं कि हम भी जब कभी पढ़ते थे तो हमें कभी प्रिंसीपल के पास जाने का मौका ही मिल जाए तो हमारे लिए वह बहुत बड़ी बात होती थी और आज के छात्र इतने खुशकिस्मत है कि उन्हें शिक्षा मंत्री के रू-ब-रू बात करने का मौका मिल रहा है। पर बात वही है कि हम समय को संभालते कैसे हैं ?वहां पर छात्र अपने मन की अवस्था को बता रहे थे । सरकारी स्कूलों में आ रहे परिवर्तन ,शिक्षा क्रांति का जिक्र कर रहे थे ।कुछेक छात्राओं ने मानसिकप्रेशर की बात की, छात्र भावुक भी हो रहे थे, पर जब तक हम अपनी भावुकता पर कंट्रोल नहीं करेंगे, भावनात्मक स्तर पर अपने आप को मजबूत नहीं कर पाएंगे, तब तक हम खुद के साथ देश को आगे नहीं ले जा पाएंगे। अगर हमें अपने देश को आगे लेकर जाना होगा तो हमें भावनात्मक स्तर पर स्वयं के साथ-साथ अपने साथी दोस्तों को भी भावनात्मक स्तर पर मजबूत बनाना होगा ।एक चींटी भी बार-बार जब दीवार पर चढ़ती है ,सौ बार गिरती है, फिसलती है ,फिर चढ़ती है। एक मकड़ी भी बार-बार जाला बुनती है ।अंत में वह कामयाब हो जाती है। आज छात्रों को भी किसी एक इम्तिहान में पास न होने पर अपने मन को व्यथित नहीं करना होगा ,उन्हें अपना इरादा मजबूत रखना होगा ।जिंदगी इतनी आसान नहीं है, जिंदगी इतनी मुश्किल से मिलती है ।"मानव जन्म दुर्लभ है देह न बारंबार" दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी कहा है। फिर भी हम इस मानव जन्म में आकर मानव जामा पहन कर हम अपने आप को कमजोर समझ लेते हैं। हमें किसी भी हालत में अपने आप को कमजोर नहीं बनाना है। हमें सदैव अपने आप को भावनात्मक स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा के साथ मजबूत बनाना है। प्रोग्राम के दौरान जो विचार मेरे मन में घूम रहे थे उन विचारो को मैंने आपके सामने रख दिया।इसी दौरान तस्वीरों के आदान-प्रदान का सिलसिला चल रहा था जो तस्वीर कैमरे में थी, अब जिनकी थी, उनको तो देनी ही थी ना!! वह तस्वीर इधर-उधर कर रही थी! बस ऐसे ही करते-करते फेसबुक को खोल लिया और फेसबुक पर जैसे ही एक समाचार आया कि आपकी पुस्तक का दूसरा एडिशन प्रकाशित हो रहा है।हैरान करने वाला पोस्ट था।2016 में मेरा पहला काव्य-संग्रह "ओस की बूँदें "छपा था और जब मैंनें यह समाचार देखा कि यह पोस्ट प्रकाशक की ओर से था। मुझे अति प्रसन्नता हुई ।थोड़ी सी मैं भावुक हो गई क्योंकि इस पुस्तक की मेरे पास मात्र एक ही प्रति बची हुई थी और जब मैंनें इसका दूसरा एडिशन देखा और कवर पेज देखा तो मुझे अति प्रसन्नता हुई। मैं और अधिक सकारात्मक ऊर्जा से भर गई ।बस यही चाहती हूँ कि जिंदगी में सरलता बनी रहे। स्वभाव में सहजता बनी रहे। जिसे भी मिलूँ, अपने सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान करती रहूँ। दूसरों की सकारात्मक ऊर्जा से अपने जीवन को संवारती रहूँ।
यहाँ पर पुस्तक के बारे में भी प्रकाशक की ओर से लिखे गए विचारों को आपके साथ साझा कर रही हूँ।
‘ओस की बूँदें’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के विविध रंगों का संवेदनशील प्रतिबिंब है। जिस प्रकार ओस की छोटी-सी बूँद अपने भीतर पूरी प्रकृति की सुंदरता समेट लेती है, उसी प्रकार इस काव्य-संग्रह की रचनाएँ मनुष्य के भावों, संघर्षों, रिश्तों, प्रेम, पीड़ा, आशाओं और सामाजिक यथार्थ को शब्दों में पिरोती हैं।
इन रचनाओं में कहीं प्रकृति की मधुरता है, कहीं मन की गहराई, कहीं देशप्रेम की पुकार तो कहीं समाज की सच्चाइयों का सजीव चित्रण। हर कविता पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ते हुए उसे सोचने, महसूस करने और भीतर तक स्पर्श करने का प्रयास करती है।
यह पुस्तक उन भावनाओं की यात्रा है जो कभी मुस्कान बनकर उभरती हैं और कभी आँखों में ओस की बूँदों की तरह ठहर जाती हैं। ‘कुछ शब्द पढ़े नहीं जाते, महसूस किये जाते हैं।’"
First Edition - 17 July 2016
Second Edition - 25 June 2026
लेखिका - डॉ. पूर्णिमा राय
प्रकाशन - श्री सत्यम् प्रकाशन
#shreesatyamprakashan #sahityasagar
#books #nonfictionbooks #writer
क्रमशः
‘ओस की बूँदें’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के विविध रंगों का संवेदनशील प्रतिबिंब है। जिस प्रकार ओस की छोटी-सी बूँद अपने भीतर पूरी प्रकृति की सुंदरता समेट लेती है, उसी प्रकार इस काव्य-संग्रह की रचनाएँ मनुष्य के भावों, संघर्षों, रिश्तों, प्रेम, पीड़ा, आशाओं और सामाजिक यथार्थ को शब्दों में पिरोती हैं।
इन रचनाओं में कहीं प्रकृति की मधुरता है, कहीं मन की गहराई, कहीं देशप्रेम की पुकार तो कहीं समाज की सच्चाइयों का सजीव चित्रण। हर कविता पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ते हुए उसे सोचने, महसूस करने और भीतर तक स्पर्श करने का प्रयास करती है।
यह पुस्तक उन भावनाओं की यात्रा है जो कभी मुस्कान बनकर उभरती हैं और कभी आँखों में ओस की बूँदों की तरह ठहर जाती हैं। ‘कुछ शब्द पढ़े नहीं जाते, महसूस किये जाते हैं।’"
First Edition - 17 July 2016
Second Edition - 25 June 2026
लेखिका - डॉ. पूर्णिमा राय
प्रकाशन - श्री सत्यम् प्रकाशन
#shreesatyamprakashan #sahityasagar
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क्रमशः
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