पोस्ट संख्या- 10 क्या वक्त आया साथियो इन्सां लड़े इन्सान से।

 गज़ल- 10 पोस्ट संख्या- 10



क्या वक्त आया साथियो इन्सां लड़े इन्सान से।

बेड़ी पड़ी है पाँव में बेटी डरे यजमान से।1)

ये उम्र जिस औलाद की खातिर हुई कुर्बान थी,

कन्धे पिता के दब रहे अब पुत्र के अहसान से।।2)

लहरें किनारा ढूँढती पथ से भटकती नाव जब,

मंजिल लहर को तब मिले लड़ती रहे तूफान से।।3)

ये प्रेम का हुआ असर जलने लगा बुझता दिया,

लपटें उठी शोला बनी बस प्रेम की पहचान से।।4)

निज घर भुला के मन कहाँ तू पाये'गा अब चैन को,

तल्खी फिजा में अब भरी बस दूर रह व्यवधान से।।5)

सत्गुरु चरण की धूल को मस्तक लगायें "पूर्णिमा"

गुरु श्रेष्ठ जग में ही रहा हर बार बस भगवान से।।6)


डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।

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