पोस्ट संख्या- 19संघर्ष ही नारी का असली शृंगार है

 गज़ल- 19 पोस्ट संख्या- 19



संघर्ष ही नारी का असली शृंगार है।
भरा हुआ नारी में असीम प्यार है।। l
हक के लिये उठाती जब आवाज़,
बदल जाता लोगों का व्यवहार है।।
उसकी मासूमियत नहीं है कमजोरी ,
चण्डी दुर्गा का रूप वह साकार है।।
नारी न नारी की करे जड़ें खोखलीें,
नारी के बिना साकी अधूरा संसार है।।
सिक्कों की खनक से कीमती मुस्कान,
मुस्कान नारी की जीवन का आधार है।।
घर ,परिवार, समाज, देश और राष्ट्र पर,
नारी ने ही किया "पूर्णिमा  उपकार है।
डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब
19/5/23




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