पोस्ट संख्या- 7ख्वाब तेरा दिल में उतरा जब से है

 

गज़ल-7 पोस्ट संख्या-7




ख्वाब तेरा दिल में उतरा जब से है

निगाहों में इज़हारे प्यार तब से है।।

गिला न कोई मिट्टी के मानव से 

उम्मीद तो हमें हर वक्त रब से है।

कभी देखा था पेड़ की शाख हिलते

हवाओं में असर तुम्हारा कब से है।

चले जाओगे यूँ बिन बुलाये सनम,

शिकायत तो सिले हुये लब से है।

कहीं खो गया है दिल ढूँढूँ किधर,

फिजाओं में घुला ज़हर जब से है।

है वक्त का तकाजा संभल' पूर्णिमा'

खुमारी चढ़ी चाँद पर शब से है।।


डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब





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