बात जो दिल को छू गई!

बात जो दिल को छू गई!


 पोस्ट संख्या-71

पिछले कुछ दिनों से स्कूल छात्रों की मौखिक और लिखित जांच करने के लक्ष्य से अलग-अलग स्कूलों का दौरा करने की ड्यूटी लगी है।इसी दौरान प्रतिदिन नए-नए स्कूल और अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ।कभी-कभी कुछ बच्चे सहज भाव में ऐसी बातें कह जाते हैं जो दिल को छू जाती हैं। मैडम !आप हमारे स्कूल में 2:00 बजे तक रुकेंगे? क्या आप हमें हिंदी पढ़ाया करेंगे? क्या आप हमें कल फिर पढ़ाने आएंगे? आपने हमें बहुत अच्छा पढ़ाया है! बच्चे यही कह रहे थे कि हमें आपसे मिलकर अच्छा लगा। इतने सारे जवाबों से घिरे हुए प्रश्नों की मुझे उम्मीद नहीं थी। और न ही मैंनें छात्रों से अभी अपनी कोई विशेष बात प्रारंभ की थी ।मैंने तो महज़ बच्चों से अपनेपन से यही पूछा था कि आप सब कैसे हो? मुझे देखकर तुम लोगों को डर तो नहीं लग रहा! ।बच्चों के इन प्रश्नों को सुनकर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या उत्तर दूँ। फिर मैंने भी सहज भाव में कह दिया ,आप सब अच्छा पढ़ोगे तो मैं फिर आपको मिलने आऊँगी। अगली बार जब मैं आपके स्कूल आऊँगी तो मैं आपको कक्षा में जरूर पढ़ाऊँगी। इस बार तो मैं सिर्फ आपका टैस्ट लेने आई हूँ, मैंने तो आज तुम लोगों को पढ़ाया नहीं है। मेरे द्वारा बच्चों का मूल्यांकन करना, बच्चों को यही लग रहा था कि मैंनें उनको पढ़ाया है।मुझे नहीं पता कि मैंने जो उत्तर दिया वह सही है या नहीं, पर जिंदगी में कभी-कभी ऐसी छोटी-छोटी चीजें मन को फिर एक ऊर्जा से भर देती हैं। नई दिशा में आगे बढ़ने के लिए‌ प्रेरित करती है।जब मूल्यांकन के पश्चात मैंने उनसे कहा कि हम सब एक सामूहिक फोटो खिंचवाते हैं तो बच्चे बहुत खुश थे और कहने लगे यह फोटो हमें दे दीजिएगा।इसका अभिप्राय यह है कि बच्चों के मन में भी कुछ चीजें सहेजने की इच्छा होती है। बस छात्रों की मनोदशा को समझकर उनके अनुकूल शिक्षण करना ही सबसे बड़ा सत्य है।

डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 

29/9/25

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