नई ताज़गी

 नई ताज़गी

पोस्ट संख्या-78
हरा-भरा उपवन, उजली धूप है छाई,

फूलों सा मन, आँखों में चमक समाई।
लाल रंग के परिधान में खिली मुस्कान,
आसमान को छूती अच्छाई की पहचान।
प्राकृतिक छाया में ली गई यह तस्वीर,
हर चेहरे पर लाती नई ताज़गी की लकीर।
हौंसलों की पंखुरी, आत्मविश्वास भरी,
इक सजीव कहानी,तस्वीर में उतरी।
कुछ पत्तों की सरसराहट,कुछ जड़ों की बात,
इस मुस्कान में छुपी हैं कई सौगात।
धरती जैसी गरिमा, छांव सी शरमाई,
सच्चाई और सरलता संग आई।
"पूर्णिमा"तस्वीर में है जीवन का संदेश,
रंग-बिरंगे सपनों की मीठी आस।
मुश्किल राहों में भी कितनी सौम्यता,
खुद में समेटे यह मुस्कुराती प्यासी प्यास।
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 

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