मेरी तन्हाई---कीमत (भाग-10)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

मेरी तन्हाई---कीमत  (भाग-10)
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब


गर्मी के दिनों में घर से बाहर जाना काफी मुश्किल लगता है। पर फिर भी कोई ना कोई कार्य ऐसा आ पड़ता है कि हमें इसके लिए घर से बाहर जाना ही पड़ता है ।दैनिक रोजमर्रा के जीवन के लिए, सुख सुविधाओं की आपूर्ति के लिए घर से बाहर तो निकालना ही पड़ता है ।आज यूँ ही मन हुआ कि बड़े दिन हो गए हैं ,अपने मोबाइल के फोन का कवर उतार कर साफ नहीं किया है तो बस मन ने सोचा कि चलो साफ कर उतार लेती हूँ। जैसे ही कवर उतारा तो मेरे सोच से बहुत आगे मुझे कुछ दिखा ।आप भी हैरान हो गए होंगे कि ऐसा क्या दिखा होगा ?फोन के कवर उतरने पर क्या कहूँ,जैसे ही फोन का कवर उतरा तो फोन की पिछली स्क्रीन पर स्क्रैच पड़े हुए थे जो कि मेरी सोच से भी बहुत ज्यादा आगे था, क्योंकि अभी थोड़े दिन हुए ही मैंने फोन लिया था पर अब वस्तु है , गिरेगा तो टूटेगा ही, पर जिस बात का हमें अंदाजा भी ना हो और अगर वह अचानक ऐसे हो जाए तो लगता है लो अब और फालतू का खर्च आ गया ।चलो, अब क्या किया जा सकता है? ठीक तो करवाने जाना ही होगा ! फिर थोड़ी देर आराम किया सोचा! चलो ,पता करते हैं जाकर! इसका वास्तविक मूल्य क्या होगा? जहाँ से फोन लिया था उस शोरूम की ओर चल पड़ी ।अभी रास्ते में हरी बत्ती /लाल बत्ती के संकेत भी बहुत आते हैं और गर्मी होने की वजह से वहाँ पर रुकना तो लोगों के लिए दुश्वार ही होता है। और नियम भी बहुत सख्त बने हुए हैं। ऐसे ही फोन को ठीक करवाने की धुन में मैं जल्दी-जल्दी स्कूटर से जा रही थी तो मैंने रास्ते में लाल बत्ती के इशारे पर अपनी स्कूटर को रोक लिया पर लाल बत्ती के पास रुकते समय सफेद लाइन (स्टॉप लाइन) को पार नहीं करना चाहिए ।आपके वाहन का अगला हिस्सा हमेशा इस सफेद लाइन के पीछे ही रुकना चाहिए । मेरे एक्टिवा का थोड़ा सा आधा टायर  सफेद लाइन से बाहर निकल गया ।मेरे आगे और भी कार खड़ी थी, दो मोटरसाइकिल भी खड़े थे। मैं अपनी धुन में चुप करके खड़ी थी ।पीछे से आवाज आती है। मोटरसाइकिल पर सवार साधारण व्यक्ति की, जो मुझे पंजाबी में कहता है-- बहन जी, तुसी वी स्कूटर पिछे कर लो, नहीं ते चलान हो जानां, इतने में मैंने उसकी आवाज सुनी और बिना सोचे समझे मैंनें जल्दी से स्कूटर को पीछे किया क्योंकि मुझे नियमों की याद आ गई थी।अभी पीछे कर ही रही थी तो साथ ही उसकी आवाज आ रही है ,अब तो शायद चालान हो भी गया होगा। इसी बीच हरी बत्ती होती है तो मैं अपने रास्ते की ओर अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ जाती हूँ। आगे बढ़ते हुए यही सोच रही हूँ कि लोग नियमों का उल्लंघन कितनी आसानी से कर लेते हैं ।अगर एक बार नियम का पालन हो भी जाता है तो फिर हम उन नियमों को भूल जाते हैं । यह सोचकर भी अच्छा लगा कि आज का नागरिक जो कि इन सब दायित्व को निर्वहन करने में अपना बेहतरीन देने का प्रयास कर रहा है ।अगर सब नागरिकों की सोच ऐसी हो जाए ,एक दूसरे को समझने लग जाए तो शायद दुनिया में रहना और आसान हो जाएगा। अभी थोड़ी आगे ही गई तो एक लाइट और आ गई। वहाँ क्या देखती हूँ? वहाँ देखती हूँ कि जो पहली लाइन में लोग खड़े हैं ,वह सारे के सारे ही सफेद पट्टी से बहुत ज्यादा आगे अर्थात वह सब लोग सफेद लाइन को पार करके ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर गाड़ी रोककर  खड़े थे , उन्होंने सिग्नल जंप किया था एवं  नियम का उल्लंघन किया था, जिससे उनका चालान कट सकता था। उनके पीछे जो दूसरी लाइन वाले स्कूटर जा रहे हैं, गाडियाँ आ रही है, वह बिना देखे ही उनकी धुन में ही वह भी आगे -आगे हो जाती है और इस बीच उनसे  नियम भंग हो जाते है,वह नियम का पालन करना भूल जाते हैं।  कहते हैं जो पहली पंक्ति में खड़े होते हैं, उनको बड़े सावधान और अनुशासन में रहना चाहिए और नियमों का पालन करना चाहिए क्योंकि उनके पीछे ही जो दूसरी पंक्ति बिना सोचे समझे  लग जाती है। यह बात बड़ी सामान्य लगेगी, पर मुझे यही सोच कर अच्छा लग रहा है कि नियम का निर्वहन करते हुए हमें सतर्क रहना चाहिए। हमारी एक वस्तु टूट जाती है या खराब हो जाती है तो उसका नुकसान सिर्फ हमें होता है उसकी कीमत  हमें भरनी पड़ता है, पर जब कई बार हम सामाजिक नियमों का उल्लंघन करते हैं तब उसका कीमत हमें तो अदा करनी ही पड़ती है पर हमारी गलती की वजह से अन्य लोग भी उस दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसलिए जब भी हम कभी कहीं पर भी पहली पंक्ति में खड़े हों तो हमें पूर्ण नियमपूर्वक ,विश्वास ,अनुशासन व सतर्कता के साथ ही खड़े होना चाहिए। क्रमशः 

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