मेरी तन्हाई : प्रेरणा: सुमेल दिवस (21जून विशेष)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब


मेरी तन्हाई : प्रेरणा: सुमेल दिवस (21जून विशेष)
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब


आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। एक ऐसा सुमेल दिवस जहाँं, हम अपने तन-मन का सामंजस्य बिठा पायें। व्यायाम करना कसरत करना हमारे शरीर का एक आवश्यक तत्व है। जैसे पांच तत्वों से हमारा शरीर बना है इस तरह योग को भी मैं एक आवश्यक तत्व मानने लगी हूँ। जिसकी तरफ हमारा कभी ध्यान ही नहीं जाता है। शायद मैं भी आपकी तरह ही थी ।कभी जीवन में सैर करना, कसरत करना, व्यायाम करना इसके लिए समय ही नहीं निकाल पाती थी और लगता था कि इसकी मुझे जरूरत भी नहीं थी। इतनी भाग दौड़ भरी जिंदगी बचपन से ही थी जिस वजह से लगता था कि हम ऐसे ही स्वस्थ हैं और सच कहूँ तो मैं अपने बचपन एवं युवावस्था तक  भी स्वस्थ ही रही ।जब हम एक सकारात्मक सोच के साथ जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं तब गरीबी भी हो ,धन का अभाव भी हो पर आपके घर के भीतर सकारात्मकता का संचार  हो तो आप कभी भी अपने आप को अस्वस्थ महसूस नहीं करते हैं। आज की जीवन शैली में बदलाव होने की वजह से ,तकनीकी युग आ जाने की वजह से और वातावरण में धुंधलापन आ जाने से हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने की बहुत अधिक आवश्यकता है। ऐसी-ऐसी बीमारियां आई है जिसका अपने हमने बचपन में कभी नाम तक नहीं सुना होता था और आँखों के चश्मे की बात करें तो कोई ऐसा विरला व्यक्ति ही नजर नहीं आता था ।कोई ऐसा युवा ,कोई ऐसा बच्चा नजर नहीं आता था जिसको चश्मा लगा हो ।पर आज स्थिति अलग है।आज बहुत ही कम व्यक्ति , युवा  एवं बच्चे नज़र आते हैं जिन्हें चश्मा ना लगा हो। हैरानी की बात है कि हमारे आसपास का माहौल खराब है ,हम सब यही कहते हैं। जिससे  भी बात करो ,सुनो,वह यही कहता है कि आजकल वातावरण सही नहीं है। खाना-पीना सही नहीं है ।पर क्या कह देने मात्र से समस्या का हल निकल जाएगा ,नहीं निकलेगा ।इसके लिए हमें कोशिश करनी होगी ।अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आज के एक दिन भी हमने अपने शरीर के लिए सारी व्यस्तताओं से समय निकालकर अगर समय दिया है तो हमें उस परमात्मा का, परवरदिगार का शुकराना अदा करना चाहिए कि उसने हमें तंदुरुस्त जीवन जीने के लम्हों में बढ़ोतरी कर दी है ।जब हम बिल्कुल शांति से अपने लिए ही समय निकालेंगे ,तब हमारे दिमाग में कोई और भी हलचल नहीं होगी। कोई मानसिक भूकंप नहीं होगा तो उस वक्त किए गए 5 मिनट का व्यायाम भी आपके लिए लाभदायक होगा ।शायद मुझे ताउम्र यही लगता था कि यह सब बेकार है ,व्यर्थ है या समय का अभाव कह कर हम समय को टाल जाते थे ।पर आज अपने व्यस्तता भरे जीवन से भी विशेषत: समय निकालकर मैं योगाभ्यास करती हूँ। मैं अपने करीबी एक  समूह से जिन्होंने योगाभ्यास के लिए ऑनलाइन माध्यम का लिंक भेजा था,उससे मैंने ज्वाइन किया था कि देखते हैं कि कर पाऊँगी या नहीं।उनकी मैं दिल से शुक्रगुजार हूँ। मुझे लगता है कि अगर मैं उस लिंक के माध्यम से घर बैठकर ही योगाभ्यास कर रही हूं तो मैं अपने आप को बहुत धन्यवाद करती हूँ अपने आप की भी मैं शुक्रगुजार हूँ क्योंकि मेरा मन जितना पहले सकारात्मक सोच से भरा रहता था उससे अब और कई गुना सकारात्मक ऊर्जा मुझ में आ गई है। मुझ में एक ऐसा बदलाव आया है कि मैं अपने आप को हर समस्या का समाधान करने के काबिल और अधिक महसूस करने लग गई हूँ। कसरत एवं व्यायाम ऑनलाइन करना या ऑफलाइन करना, जिम में जाकर करना या जहाँ भी आपको लगता है ,अपनी सुविधा अनुसार इसका हिस्सा बनना बहुत आवश्यक है। ऐसा नहीं है कि उम्र के इस दौर में मुझे अभी भी कोई बीमारी नहीं है। हाँ, अब हमने बीमारियों के नाम सुना आरंभ कर दिया है। हमें दवाइयों की अधिक जानकारी होने लग गई है ।जब हम बचपन में थे, युवा थे,तब हमें ना तो कभी पेट दर्द की भी दवाई खानी पड़ती थी। बहुत ही कम कभी-कभी बुखार आता था ।यदा कदा ही हम बीमार होते थे ।मुझे आज तक याद है कि मैंनें एक लंबी अवस्था तक कभी भी कोई दवाई का इस्तेमाल नहीं किया था क्योंकि घर का माहौल ही ऐसा था जो हमें बीमारी में भी एक हिम्मत देता था।  आज के ऐसे वातावरण में भी मैं सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुए महसूस करती हूँ।निरंतर योगाभ्यास करने से मैं अब पहले से भी और अधिक सकारात्मक हो चुकी हूँ। मानसिक तनाव आता है, इंसान हूँ। चीजें चुभती भी  हैं दुख भी होता है लेकिन यह सब होना भी जरूरी है क्योंकि भावनाओं के बिना इंसान अधूरा है ।वह इंसान नहीं मशीन कहलाएगा।अब तनाव,विषाद दुःख कीअवस्था से बाहर निकलने का ढंग मिल गया है ।अपने लिए समय निकालना अच्छा लगता है।हमें निरंतर अपने दिन के कुछ घंटे में से 5 मिनट उस वक्त सिर्फ अपने आप को ही देना चाहिए। जब ना तो हमारे मन में कोई हलचल हो ना हम किसी से बात कर रहे हो। ना हमारे आसपास फोन हो। हम सिर्फ और सिर्फ अपने लिए जी रहें हो। अगर वह 5 मिनट हम  निकालना आरंभ कर देंगे तो मुझे लगता है कि हम जिंदगी को अच्छे से जी रहे हैं ,अच्छे से जी पाएंगे। अभी मैं निरंतर शाम के समय ही योगाभ्यास ,कसरत करती हूँ। पर मुझे लगता है कि सुबह के समय जल्दी उठकर कसरत और व्यायाम करता अधिक लाभदायक है ।यह बात मैं अच्छी तरह से जानती हूँ। लेकिन कहते हैं जब तक आपका तन और मन एक साथ संतुलन में नहीं आएगा। तब तक आप अपने आप में बदलाव नहीं कर सकते ।अभी तो पहले मैं अपने मन के भटकाव को दूर करके तन को योगाभ्यास का आदी बना रही हूँ।मुझे उम्मीद है कि वह दिन भी दूर नहीं होगा। जब रात को समय पर सोकर एवं सुबह जल्दी उठकर योगाभ्यास करना आरंभ कर दूँगी ।इसके लिए सबसे पहले रात को एक अच्छी नींद का आना बहुत ही जरूरी है और अच्छी नींद लाने के लिए आपके मोबाइल फोन से थोड़ी दूरी बनानी होगी। अपने समय का प्रबंध करना होगा क्रमशः

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