मेरी तन्हाई- लक्ष्य (भाग-4)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

मेरी तन्हाई- लक्ष्य (भाग-4)
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

दीवारों पर आई सीलन की वजह से पड़ गई दरारों को छिपाने के लिए पॉलिश और  लीपापोती करवाई जाती है। अक्सर लोग यही सोचते हैं कि बरसात आने से पहले दरोदीवार को पक्का कर लिया जाए और इन दिनों में मई-जून के महीने में थोड़ी गर्मी होती है, जिस वजह से पेंट की हुई  दीवारें आसानी से सूख भी जाती हैं और दिन भी तनिक लंबे होते हैं जिस वजह से कार्य को पूर्ण करने में आसानी लगती है। पर यह नहीं सोचा जाता कि जो लोग गर्मी के दिनों में पेंट, पॉलिश का काम करते हैं ,उन पर क्या बीतती है। हम अपने आनंद के लिए,अपने अवकाश का सही इस्तेमाल करने के लिए यह कार्य आरंभ कर देते हैं लेकिन जिसको मेहनत करनी है ,वह पूरी शिद्दत के साथ इस कार्य को करने में जुट जाता है। मकान मालिक के मन में यही रहता है कि इतने पैसे ही मुझे देने हैं, ज़रा  एक कप चाय या एक वक्त की रोटी अगर उसे देनी पड़ जाएगी तो उसको गर्मी का अहसास होने लगता है पर धूप में कार्यरत व्यक्ति के मन में यही दुविधा रहती है कि कहीं पेंट किसी दीवार से छूट न जाए , कहीं दरारे भरने में पीछे ना छूट जाऊं और मेरे काम में नुकस न निकाल दिया जाए ।दोनों की सोच में अंतर है। दोनों अपने-अपने स्थान पर अपना-अपना भला ही सोच रहे हैं । भला सोचने का भाव भी अलग-अलग है जो व्यक्ति मेहनत करना जानता है वह अपने कार्य को अच्छे से कर पाता है। वह गर्मी, धूप, बारिश का एहसास अपने ऊपर नहीं होने देता क्योंकि उसके मन में यही भाव है कि उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचना है, अपनी मंजिल को पाना है और उसका परदेस में आकर कार्य करने का जो सपना है और उस सपने से अपने घर की आजीविका को चलाना है, यह उसका सपना उसके लिए सर्वश्रेष्ठ होता है पर जिस व्यक्ति को सब कुछ आसानी से मिल जाता है,उन लोगों को इन वस्तुओं की, इस धन की कद्र नहीं रहती है। वह इन सबको आसानी से गँवा लेते हैं और फिर जब समय नहीं रहता तो बाद में उनको पछताना पड़ता है। क्रमशः



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