मेरी तन्हाई- चिर निद्रा भाग-6 डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
मेरी तन्हाई- चिर निद्रा(भाग-6)
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब
आपकी लेखनी में गहराई है, नए विचारों का संचार है, और दिल को छू लेने वाली बातें हैं ! जब यह कमेंट फेसबुक पर अपनी लिखी हुई रचनाओं के संबंध में देखती हूँ तो यही सोचती हूँ कि वक्ता/ लेखक का लिखना अपने लिए जितना आवश्यक होता है उतना ही आवश्यक पढ़ने वालों और श्रोताओं के लिए होता है ।अगर आपके पास भावुक हृदय रखने वाले पाठक होंगे तो वह आपकी रचनाओं को पढ़ना पसंद करेंगे ।यह जरूरी तो नहीं कि हर रचना ही हर एक पाठक को पसंद आएगी ।पर रचनाओं से अगर किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए तो वैसी रचनाएं लिखना सार्थक हो जाता है, जो रचनाएं किसी के हृदय को तसल्ली दे दें, वह रचनाएं ही लोगों को अपनी लगने लगती है।शून्य बनकर जिंदगी जीने का अर्थ है विनम्र रहना। समाज में कमल की भांति निर्लेप रहकर विचलन करना बहुत ही मुश्किल होता है। आपकी संवेदना पूरित कविताएं एवं आत्मकथ्यात्मक सृजन जहाँ समाज को दिशा दे सकता है वही आपके अपने व्यक्तित्व को व अंतर्रात्मा को भी संतुष्टि देता है। चिर निद्रा में सोई हुई मैं तब अचानक से उठ जाती हूँ, जब फोन की घंटी बजती है और देखती हूँ काफी समय हो गया है। सर थोड़ा-थोड़ा सा भारी लगता है। फिर एकदम से सचेत हो जाती हूँ और याद आता है कि आज तो ऑनलाइन मीटिंग है और जल्दी से ऑनलाइन माध्यम से मीटिंग में जुड़ जाती हूँ। जो व्याख्याता है, जो व्याख्यान दे रहा है, किसी संदर्भ में अपने विचार समझा रहा है, उसको समझने का धीरे-धीरे प्रयास करती हूँ और शीघ्र ही उस वार्तालाप के साथ अपने मन का साधारणीकरण कर लेती हूँ। शिक्षक हूँ, इसी वजह से अवकाश के दिनों में भी छात्रों के भलाई के लिए तत्पर रहना ही हमारा लक्ष्य रहता है।यही कोशिश रहती है कि अपने समय को बेहतरीन ढंग से प्रयुक्त किया जाए और टीमवर्क के साथ टीम का सहयोग और टीम की नई उम्मीदें देखकर आगे बढ़ाने की ललक सोई हुई आत्मा को जागृतावस्था में ले आती है ।सब ओर यही संदेश दिखाई दे रहा है -कुछ अच्छा करें, किसी की भलाई के लिए काम किया जाए, कुदरत से प्रेम करो ,पौधों का संरक्षण करो ,अधिक से अधिक छात्रों को आगे बढ़ाओ, जनगणना करने में योगदान दीजिए ,समाज में फैली हुई कुरीतियों के बारे में निरीक्षण कीजिए ,उनके समाधान के हल ढूंढना ,किसी ने कोई अच्छा कार्य किया है तो उसकी छपी हुई तस्वीर को अलग-अलग मैसेज में देखना और उनके अंतर्मन की भावनाओं को समझने की कोशिश करना कि इस वक्त उस व्यक्ति के मन में क्या चल रहा होगा, जो जिस भी कार्य में लगा हुआ है! उसकी भीतरी हलचल को महसूस करना एवं उसके अंदर की छटपटाहट को महसूस करना यह सब अपना सा लगने लगता है। एक नई सुबह के साथ, एक नव ऊर्जा के साथ, नव उम्मीद के साथ, नए जोश के साथ एक स्थान पर बैठकर भी दूर-दूर तक ऑनलाइन माध्यम से पहुँच करने के लिए लक्ष्य की ओर मन उड़ान भरने लगता है!!
क्रमशः
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