दोहे_पूर्णिमा :रोजगार की खोज में
दोहे_पूर्णिमा :रोजगार की खोज में
दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी, लोगों की यह भीड़!
रोजगार की खोज में,लगी टूटने रीढ़!!१
जनसँख्या दर रोकनी, कुछ तो करो उपाय!
शिक्षित हों उल्लास से,बढ़ जायें व्यवसाय!!२
जागृत हों वोटर सभी ,मत निर्णय हकदार!
आत्मसजगता भाव ही,प्रगति का आधार!!३
भूख-गरीबी मार से ,लोग हैं परेशान!
वोट के बदले नोट से,कहाँ मिले सम्मान!!४
दर-दर भटके जिंदगी,भूत भविष्य वर्तमान!
कहे 'पूर्णिमा' विश्व से ,श्रम करना आसान!!५
डॉ.पूर्णिमा राय,
दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी, लोगों की यह भीड़!
रोजगार की खोज में,लगी टूटने रीढ़!!१
जनसँख्या दर रोकनी, कुछ तो करो उपाय!
शिक्षित हों उल्लास से,बढ़ जायें व्यवसाय!!२
जागृत हों वोटर सभी ,मत निर्णय हकदार!
आत्मसजगता भाव ही,प्रगति का आधार!!३
भूख-गरीबी मार से ,लोग हैं परेशान!
वोट के बदले नोट से,कहाँ मिले सम्मान!!४
दर-दर भटके जिंदगी,भूत भविष्य वर्तमान!
कहे 'पूर्णिमा' विश्व से ,श्रम करना आसान!!५
डॉ.पूर्णिमा राय,
शिक्षिका एवं लेखिका ,पंजाब
11जुलाई ,2026
11जुलाई ,2026
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