आपबीती ---खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह ,हो गई नव जगमगाहट

 

आपबीती ---खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह ,हो गई नव जगमगाहट----------(डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब)


रात (31अगस्त )को निश्चिंत होकर सो गई कि अब सुबह आराम से ऊठूँगी और अपने सितंबर महीने के कार्य का आगाज करूँगी ।ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर होने के नाते हमें अपने विजिट करने वाले स्कूलों की सूचना पहले फार्म में भरनी होती है ।आज मैंने एक दिन पहले ही वह सूचना भर दी और रात को सो गई। सोये हुए अचानक मुझे एकदम से गोल-गोल सिर घूमने जैसा महसूस हुआ । यह चक्कर बहुत ही खतरनाक था।उस वक्त मेरे मन से यही आवाज आई कि हे भगवान मुझे कुछ नहीं होगा! मैंनें इसी अवस्था में दोनों हाथों की मुट्ठियों को भींच लिया और अपने आप को समझाया कि मुझे कुछ नहीं होगा ।पर चक्कर रुक-रुक आते ही जा रहे थे। मैंनें उठने का प्रयास किया, पर उठ नहीं पाई। फिर मैंनें दायीं करवट बदलनी चाही तो भी मेरा सिर बहुत तेज घूमा। मैंनें फिर बाईं तरफ कोशिश की तो भी मेरा सिर बहुत तेजी से घूमने लगा।इस समय मैं बहुत घबरा भी रही थी और डर भी रही थी ।यही मन में आ रहा था कि कहीं मुझे कुछ हो ना जाये। इसी बीच मेरे हाथ भी सुन्न होने लग गए थे ।थोड़ी देर बाद मैंनें उठने का प्रयास किया और बड़ी मुश्किल से उठी जब मैं बिस्तर से खड़ी हुई तो मेरे बाएं पैर के अंगूठे के पास की उंगलियों में दर्द होने लगा। मैं बहुत मुश्किल से बॉथरूम तक गई और फिर वापस बिस्तर पर आकर लेटने और सोने का प्रयास करने लगी ।जब मैंनें घड़ी देखी तो 4:05 हुए थे। सोचा अभी थोड़ा सा सो जाती हूँ पर जैसे ही मैं लेटी, फिर से चक्कर आने लगे। इसी बीच मैं खुद को समझाते हुए कब मुझे नींद आ गई मुझे भी पता ना चला और जब 6.00 बजे अलार्म बजा तो मैंने बिस्तर से उठने का प्रयास किया लेकिन फिर बिस्तर पर निढाल होकर गिर गई ।घबराहट होना जायज था। बहुत मुश्किल से हिम्मत की ,फोन पकड़ा और फिर छुट्टी अप्लाई की। छुट्टी अप्लाई करते वक्त भी न मुझे घबराहट हो रही थी। छोटे-छोटे चक्कर आते जा रहे थे ।मैंने अपने डॉक्टर को फोन किया जो आपातकालीन स्थिति में ही फोन की अनुमति देते हैं ।पहले कभी उनको विशेष रूप से फोन भी नहीं किया था।मैंने उनको एक पूर्ण विश्वास के साथ फोन किया कि वह मेरा फोन जरुर उठा लेंगे ।सुबह के 7:33 बजे थे। मैंने डॉक्टर को फोन किया और अपनी स्थिति बताई तो उन्होंने मुझे व्हाट्सएप पर एक मेडिसिन लिखकर भेज दी। मेडिसिन को जब मैंने देखा तो मेडिसिन लाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। अचानक याद आया कि अपोलो फार्मेसी का फोन नंबर मेरे पास है ।मैंने उनसे पूछा कि उनके पास दवाई उपलब्ध है। जब उन्होंने हाँ में सहमति जताई तो मैंने कहा कि मैं अभी आकर ले जाती हूँ।मैंने प्रयास किया और दवाई लेने पहुँच गई ।दवाई लेने पर मुझे वहाँ भी घबराहट हो रही थी। चक्कर भी आ रहे थे और मेरी आँखों से आँसू भी आ गए। फिर भी मैंने धैर्य नहीं छोड़ा और वापिस मेडिसिन लेकर घर आई। चाय के साथ रस लिये और अपनी रूटीन की बीपी की दवाई के साथ डॉक्टर द्वारा बीपीपीवी के लिए सुझाई गई मेडिसिन का उपयोग कर लिया ।आधे घंटे के बाद मुझे थोड़े से चक्कर आने बंद हो गए और मैं बिस्तर पर लेट गई ।मुझे फिर नींद आ गई। उस दवाई से मुझे काफी आराम महसूस हुआ। सुबह की दवाई का असर चार-पांच घंटे तक रहा और मैंनें थोड़ा अच्छा महसूस किया। पर दोपहर आते-आते फिर मुझे अजीब सा महसूस होने लगा। मुझे अभी भी हल्की-हल्की हाथों में झनझनाहट सी महसूस हो रही है। मुझे पता है कि मुझे कुछ नहीं होगा और यह बीपीपीवी की बीमारी जो कान के अंदर कैल्शियम के कणों के असंतुलन के कारण होता है ।इस वजह से मुझे हुई है। मुझे डॉक्टर ने तीन दिन के लिए सुबह- शाम यह मेडिसन vertin 16 खाने के लिए लिखा है। मैं अब हिम्मत नहीं हारूँगी और यह मेडिसिन तीन दिन लगातार खाऊँगी। यहां आपबीती बताने का लक्ष्य यही है कि जब आपके पास हिम्मत है, साहस है, धैर्य है तो आप जिंदगी की जंग जीत सकते हैं। अपने मन को कमजोर नहीं होने देंगे तो आप किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हो। मुझे आज फोन भी आए। व्हाट्सएप मैसेज भी बहुत सारे कार्य से जुड़े हुए आए हैं। मैं उनको नहीं देख पाई हूँ। जैसे ही मैं अच्छा महसूस करूँगी।मैं उन सबको वापिस मैसेज का रिप्लाई कर दूँगी। निम्न लिखित कविता जो मैंने लिखी है ,आज इसी आपबीती की उपज है ।आप सोचेंगे कि अभी भी आप कविताएं लिख रहे हैं। मुझे पता है मेरा सिर अभी भी घूम रहा है और मुझे अपने दिमाग को टेंशन नहीं देनी है। पर मैं चाहती हूँ कि मेरी आपबीती के माध्यम से आप लोग भी इस समस्या के बारे में जान सके और सतर्क हो पाएं। मैंने अपने लक्षणों को जानने के लिये आनलाइन सर्च किया।इस समस्या के बारे में जानकारी हासिल की तो मुझे पता चला कि मुझे जो समस्या हुई वह बीपीवीवी की ही हुई है। अगर मेरी जगह पर शायद कोई और होता तो वह हॉस्पिटलाइज्ड हो जाता और पता नहीं फिर अस्पताल से जल्दी वापस आता या नहीं आता ।मुझे जल्दी अस्पताल में दाखिल नहीं होना है ।इसलिए मैंने अपने आप को समझाया है और आप सब की दुआएं मेरे साथ हैं ।इसलिए मुझे जल्दी कुछ भी नहीं होगा। अभी कल ही मैंने एक रिटायरमेंट पार्टी में भागीदारी की और काफी खुशी भी मिली थी और नहीं सोचा था कि रात को यह समस्या मुझे आ जाएगी और आज का दिन मेरा इस तरह व्यतीत होगा। तभी कहते हैं जिंदगी बहुत छोटी है। इस जिंदगी में जितनी भी खुशियाँ मिल सके उनको सहेज लीजिए और अपने भीतर एक दृढ़ इच्छा शक्ति को बनायें रखें ,जिसकी आज के समय में बहुत अधिक जरूरत है।


कविता----आपबीती 

अपनी उम्मीदों को पूरा करने की खुद ही रखना ताकत।।

फिर कभी भी गायब न हो पायेगी लबों से मुस्कुराहट।।

संभल जायेंगे गिर कर भी अगर दिल में हौंसला है बाकी,

तन शिथिल न होने देना मन संभाल लेगा भारी आफत।।

ठहर न पाये आँसू आँखों ने भी सह लिया दर्द इतना,

कोशिशों की झड़ी ने तन में उत्पन्न कर दी सरसराहट।।

बंद दरीचों से दिखी तब हल्की सी रोशनी की झलक,

खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह हो गई नव जगमगाहट।।

पूर्णिमा "जीतना चाहो तो अपने अहंकार को जीत लेना,

दुनिया जीतने वालों को भी दुनिया से कभी न मिली राहत।।

डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

1/9/26



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