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बात जो दिल को छू गई!

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बात जो दिल को छू गई!   पोस्ट संख्या-71 पिछले कुछ दिनों से स्कूल छात्रों की मौखिक और लिखित जांच करने के लक्ष्य से अलग-अलग स्कूलों का दौरा करने की ड्यूटी लगी है।इसी दौरान प्रतिदिन नए-नए स्कूल और अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ।कभी-कभी कुछ बच्चे सहज भाव में ऐसी बातें कह जाते हैं जो दिल को छू जाती हैं। मैडम !आप हमारे स्कूल में 2:00 बजे तक रुकेंगे? क्या आप हमें हिंदी पढ़ाया करेंगे? क्या आप हमें कल फिर पढ़ाने आएंगे? आपने हमें बहुत अच्छा पढ़ाया है! बच्चे यही कह रहे थे कि हमें आपसे मिलकर अच्छा लगा। इतने सारे जवाबों से घिरे हुए प्रश्नों की मुझे उम्मीद नहीं थी। और न ही मैंनें छात्रों से अभी अपनी कोई विशेष बात प्रारंभ की थी ।मैंने तो महज़ बच्चों से अपनेपन से यही पूछा था कि आप सब कैसे हो? मुझे देखकर तुम लोगों को डर तो नहीं लग रहा! ।बच्चों के इन प्रश्नों को सुनकर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या उत्तर दूँ। फिर मैंने भी सहज भाव में कह दिया ,आप सब अच्छा पढ़ोगे तो मैं फिर आपको मिलने आऊँगी। अगली बार जब मैं आपके स्कूल आऊँगी तो मैं आपको कक्षा में जरूर पढ़ाऊँगी। इस बार तो मैं...

वक्त

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वक्त ( कविता) पोस्ट संख्या -70 घड़ी की चलती सूई देखती हूँ  तो तनिक होती है  हलचल मन में कितना लंबा सफर   तय कर लिया  इस नाजुक तन ने वक्त तो संभाल लेती हूँ  दिमाग की लगाकर ताकत दिल नहीं संभल पाता और  निढाल होती जाती है काया!! दिल को संभाल पाने का हुनर  सीख पाऊँ यदि तो वक्त को संभालने में  फिर दिमाग लगाने की  ना पड़ेगी जरूरत!! वक्त और दिल का तालमेल "पूर्णिमा" बिठाना आ जाए कहीं जन्नत सी दुनिया और  खुशहाल जिंदगानी दिखेगी यहीं!! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  21/9/25

ए खुदा ,रुक जा ज़रा!

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  ए खुदा ,रुक जा ज़रा! By Dr.Purnima Rai पोस्ट संख्या -69 ए खुदा ,रुक जा ज़रा माना कि तुझसे सहा न जाये पृथ्वी का दर्द! पर इस तरह नाराज़ होना , तेरा बरबस बरसना बेइंतहां है !! ये सृष्टि तेरा ही तो आधार है पानी जीवन का स्रोत है भयावह मंजर न दिखा मृत्यु का भंयकर खेल न खेल!! सजीव निर्जीव हो रहे हैं आहत तनिक रहम कर , रात भी कटती बेचैन सी, सुबह भी कचोटती है ,दे रही ज़ख़्म गहरे क्यों न सुनता हरेक जन  की पुकार लगता है मेरा खुदा सच में हो गया है बहरा!! तू भूल गया था शायद कि तेरे संसार में , अब बचा प्यार नहीं, आपसी मिलवर्तन नहीं , मत परख अपने बनाये जहान को न ले परीक्षा बार -बार , देख ,खोल ले अपने नयन अश्रु सजीली बूढ़ी आँखों में झांक तेरी टेक ही है बस उनको तू यही चाहता था,देख वही हो रहा है, तेरे बनाये मनुज ही तो इस वक्त दे रहे सहारा हैं बस थम जा ,थम जा!! नज़र हो परखने की तो इंसान भी भगवान है निष्काम सेवा ही तो मानवता की पहचान है !! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 07/09/25

ए-वतन ,तेरे लिये! स्वतंत्रता दिवस विशेष

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  यूँ तो हम ,कुछ न कर सके ,ए-वतन ,तेरे लिये! वीर भावना से ,सजे कलम, जब तक चले!! (स्वतंत्रता दिवस विशेष:डॉ.पूर्णिमा राय) पोस्ट संख्या -68 अपनी राष्ट्रभक्ति, देश-प्रेम ,आत्मविश्वास, जोश ,वीर जज्बे एवं सुदृढ़ निश्चय से मंजिलों को जीतने वाले एवं अपना आप न्योछावर करने वाली वीर आत्माओं के पद चिह्नों पर चलने से कोई किसी को रोक नहीं सकता।कुछ ऐसे वीर योद्धा हुये जो चाहे आज दुनिया में नहीं हैं पर उनको किसी न किसी रूप में सदैव स्मरण किया जाता है और किया जाता रहेगा।  देश-प्रेम से दब सके,देश-द्रोह अंगार । सुप्त चेतना में भरें,मिलकर हम सब प्यार।। कहते हैं वीरता एवं साहस का अहसास खून में होता है ,काफी हद तक उचित भी है पर इससे अधिक आवश्यक है कि इस वीरता एवं जोश को बाहर निकाला जाये।मानव के भीतर साहसी प्रवृति किसी में अधिक और किसी में कम होती है ।युवाओं में खून गर्म होता है ,आम कहते सुना जाता है।उनकी शक्ति को सही दिशा दी जाये तो वह देश समाज के हित में लाभदायक होगी और अगर उनकी हिम्मत एवं शक्ति का सदुपयोग न हुआ तो वह समाज और देश का तो छोड़ो ,खुद का ही विनाश कर बैठते हैं।कोई अपनी शारीरिक बल से...

उजाले की चाह

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  उजाले की चाह पोस्ट संख्या -67 उजाले की चाह में जिंदगी न गुज़र जाये कहीं , सीख लेना हुनर उजाले बाँटने का!! ग़म के अंधेरे न छोड़ेंगे पीछा कभी, सीख लेना दिल लगाना गम की परछाइयों से!! मेरी किस्मत में जो लिखा मिलेगा मुझे इसी जन्म में, सीख लेना शामिल होना ग़ैरों के दु:ख-दर्द में !! जी रहें हैं हम वर्तमान में मगर डूबे हैं बीते वक्त की सोच में , सीख लेना बाहर निकलना गफलत की नींदर से !! जामा पहना है मानव का क्षणभंगुर होगी देह भी एक दिन, सीख जाना "पूर्णिमा " रूह से मुस्कुराना!! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 13/8/25

शिक्षा धन महादान है

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  शिक्षा धन महादान है( कविता) पोस्ट संख्या -66 कैसे यह हालात हैं। खाली सबके हाथ हैं।। यह है मेरा वे सब तेरा अपनों के जज़्बात हैं।। चहुँ ओर है मेरा-मेरी । थोड़ी बहुत हेरा-फेरी।। गुरु घर की जो टेर करे, मेहर होती उस पर तेरी।। पुण्य-कर्म कमाये जो । जीवन सफल बनाये वो।। मेहनत से पीछे ना हटता, जीते जी यश पाये सो ।। "पूर्णिमा" अंग-संग राम है । सेव्य भाव ही महान है।। जितना चाहे धन कमा लो शिक्षा धन महादान है ।। डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 

रास्ते बन ही जाते हैं !

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  रास्ते बन ही जाते हैं ! पोस्ट संख्या -65 रास्ते बन ही जाते हैं !  मुश्किलें दूर हो ही जाती हैं!!  मगर वक्त जो गुजर जाता है , और उस गुजरे पल में जो लम्हें गुजरे हैं,  वे लम्हें बार-बार , उन्हीं मुश्किलों का जिक्र ब्याँ कर देते हैं! रास्ते बन ही जाते हैं.. हमेशा खुद को ढांढस देते हैं ! औरों को भी राह सुझाते हैं!!  मगर कुछ लोग ना सुधरते हैं,  न सुधरने देते हैं,  किसी की सकारात्मकता का,  बेबाक मज़ाक उड़ाते हैं ! रास्ते बन ही जाते हैं... अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं!  अधिकारों की बातें भी करते हैं!! न जाने क्यों फिर भी कुछ लोग , अपने फ़र्जों से कन्नी कतराते हैं , और दूसरों को बार-बार ताने देते हैं! रास्ते बन ही जाते हैं... ईश्वर के दर पर भटकते हैं ! पूजा-पाठ भी बहुत करते हैं!!  खुदा की बात क्या करें , खुदा के इंसानों को पल-पल सताते हैं ! रास्ते बन ही जाते हैं.... अच्छाई का हर पल डोंग पीटते हैं !  बुराई से कोसों दूर भागते हैं!!  खुद की फिक्र ना करते ,कहते हैं ऐसा "पूर्णिमा " मान - मर्यादा को सूली पर चढ़ाते हैं  रास्ते बन ही जाते...