Posts

शुक्र करें हम ईश का

Image
  शुक्र करें हम ईश का(दोहे) पोस्ट संख्या -61 शुक्र करें हम ईश का,रखें सभी का ध्यान । माटी की इस देह का, क्यों करना अभिमान।। पंछी मांगें खैर ही,रखना उनका ध्यान। गौ माता का भूलके,मत करना अपमान।। मान मिले सम्मान भी,उत्तम हों गर बोल। कर्कश वाणी शूल-सी ,मीठी है अनमोल।। मरते पक्षी धूप से ,पानी की है भाल। चुग्गा डालें प्यार से,जल का रखना थाल।। सुबह हुई रजनी गई,सुन उद्यम का गान। राही पथ पर बढ़ रहा, मंजिल है पहचान।।  सीख नयी दे सांझ भी,हिम्मत कभी न हार। "पूर्णिमा" में शशांक भी, फैलाये उजियार।। डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  drpurnima01.dpr@gmail.com 7/6/25

ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਜੋ ਕੰਮ ਕਰਾਂਗੇ,ਹਰ ਮੁਸ਼ਕਲ ਤੋਂ ਦੂਰ ਰਹਾਂਗੇ

Image
  ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਜੋ ਕੰਮ ਕਰਾਂਗੇ,ਹਰ ਮੁਸ਼ਕਲ ਤੋਂ ਦੂਰ ਰਹਾਂਗੇ ਪੋਸਟ ਸੰਖਿਆ -60  ਸਮਾਂ ਹੀ ਜੀਵਨ ਹੈ। ਜੀਵਨ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ-- ਜਿਉਣ ਦਾ ਕੁਝ ਸਮਾਂ। ਕੋਈ ਪੰਜਾਹ ਸਾਲ ਜਿਉਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਕੋਈ ਸੱਠ ਸਾਲ। ਕੋਈ-ਕੋਈ ਹੀ ਸੌ ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਭੋਗ ਰਿਹਾ ਦਿਖਦਾ ਹੈ। ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਵੱਧ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਅਤੇ ਜੀਵਨ ਤੋਂ ਵੱਧ ਇਸ ਸੰਸਾਰ ਵਿੱਚ ਕੀਮਤੀ ਹੋਰ ਕੁਝ ਨਹੀਂ। ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅੱਜ ਦਾ ਕੰਮ ਕੱਲ ਤੇ ਨਾ ਛੱਡੋ, ਕਿਉਂਕਿ ਬੀਤਿਆ ਹੋਇਆ ਸਮਾਂ ਵਾਪਸ ਮੁੜ ਕੇ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ। ਕਿਸੇ ਨੇ ਸਹੀ ਕਿਹਾ ਹੈ-- "ਟਾਈਮ ਇਜ਼ ਗੋਲਡ" ਜਦੋਂ ਸਮਾਂ ਬੀਤ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪਛਤਾਵੇ ਦੇ ਇਲਾਵਾ ਕੁਝ ਹੱਥ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ।ਹਰ ਕੰਮ ਯੋਜਨਾ ਨਾਲ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਕੰਮ ਜਲਦੀ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਸਫਲਤਾ ਵੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।ਕਛੂਏ ਤੇ ਖਰਗੋਸ਼ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਵਿੱਚ ਕਛੂਆ ਦੌੜ ਇਸ ਲਈ ਹੀ ਜਿੱਤਿਆ ਸੀ ਕਿ ਉਸਨੇ ਸਮੇਂ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ਜਾਣ ਲਿਆ ਸੀ। ਜੋ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਕਰਦਾ ਹੈ,ਸਮਾਂ ਉਸਨੂੰ ਹੀ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ। ਜੋ ਲੋਕ ਸਮਾ ਰਹਿੰਦਿਆਂ ਸਮੇਂ ਦੀ ਸਹੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ, ਸਾਰੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਪਛਤਾਉਂਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਅਜਿਹੇ ਲੋਕ ਆਪ ਤਾਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੋਂ ਨਿਰਾਸ਼, ਅਸਫਲ ਹੁੰਦੇ ਹੀ ਹਨ ,ਦੂਜਿਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸੁਖ ਨਹੀਂ ਦੇ ਸਕਦੇ। ਇਸ ਲਈ ਸਮੇਂ ਦੀ ਸਹੀ ਸੰਭਾਲ ਕਰਕੇ ਹੀ ਅਸੀਂ ਜਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ ਤਰੱਕੀ ਤੇ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ। ਸਾਡਾ ਇਤਿਹਾਸ ਗਵਾਹ ਹੈ...

पर्यावरण बनाम मानव जीवन

Image
  पर्यावरण बनाम मानव जीवन पोस्ट संख्या -59  आज का युग औद्योगिक करण आधुनिकता एवं तकनीकी विकासवाद का युग है जिसमें सर्वत्र मैं ,मेरी का ही बोलबाला है, जहाँ इंसान अपने सामाजिक संबंधों एवं सामाजिक सरोकारों को ही धूमिल करता जा रहा है, वहाँ पर्यावरण के प्रति वह अपना कर्तव्य निभाये, यह  हास्यस्पद लगता है। पर प्रश्न उठता है कि अगर पर्यावरण ही ना शुद्ध रहा, स्वच्छ ना रहा तो सर्वत्र गंदगी व अनैतिकता की दीवारें ही दिखाई देंगी। इस पर्यावरण के प्रति सचेत करवाने का प्रयास सदैव किया जाता रहा है ।5 जून 1973 को प्रथम विश्व पर्यावरण दिवस मना कर विश्व स्तर पर सामाजिक जागृति और राजनीतिक चेतना लाने का सुप्रयास किया गया। आज आवश्यकता है --हर वर्ष नहीं बल्कि हर एक दिन पर्यावरण सुधार व बचाव के प्रति प्रत्येक बालक, युवा ,वृद्ध एवं सभ्यजन को सुसंस्कृत किया जाए। भारत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम सर्वप्रथम 19 नवंबर 1986 को लागू किया गया ।अपने साहित्य में दृष्टिपात किया जाए तो सदियों से पर्यावरण संरक्षण में लेखन की लेखनी ने प्रशंसनीय योगदान दिया है। सर्वत्र प्रकृति की स्वच्छता हमें जीवन के उज्जवल भविष...

कुदरत (कविता

Image
  कुदरत (कविता) पोस्ट संख्या -58 बारिश की बूंदें भी  शोर कर रहीं  उथल-पुथल हो रही है कुदरत में या इस बेजान दिल में ! हवाओं ने राहत दी तो है थोड़ी  कमबख़्त अपनों ने रुलाने की जिद्द  न छोड़ी अब तक!! हल्की टहनियाँ   संभाल न पा रही वज़न अपना जो लिपटी चिपकी हुई हैं अपने  पौधे से वे मन्द-मन्द मुस्कुरा रही हैं  मस्ती में !! चाहे तन भीग रहे हैं अकस्मात्  बारिश में मगर गर्मी में वर्षा की आमद कह रही है कि मन की शीतलता से ही  बचेगा संसार !! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 

मोहरा (कविता)

Image
  मोहरा (कविता ) पोस्ट संख्या -57 मेरी उड़ान सीमित  नहीं है मेरे तक मेरा सुकून भी  सिर्फ मेरा नहीं  मेरी जद्दोजहद भी मेरी नहीं  न चाहत हैं कुछ पाने की न खोने का डर अब बस एक भ्रम था कि मैं हक से कुछ कह पाऊँ आँख खुली तो  वह भी टूट गया  जो गहरा था भीतर प्याला  पलकों के कोरों से बह गया  आज फिर झूठा अपनापन एक बार फिर मन को खालीपन से भर गया अब चुप रहना है मुश्किल  इक मोहरा बनना है मुश्किल!! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 

बसंत ऋतु का आगमन

Image
पोस्ट सँख्या-56  बसंत ऋतु!!(दोहे) वर दे वीणा वादिनी, सुखी बसे संसार! बसंत ऋतु का आगमन,घर-घर में हो प्यार!! ऋतु बसंत की कह रही,करो वैर को दूर। प्रेम हवाएं बह रही, दिखता मुख पर नूर। जीवन में खुशियाँ मिलें,आये जब मधुमास। मुख पर बिखरेगी हँसी,करें हास- परिहास।। शोभा सोहे बाग़ की,छिप जाती फिर धूल। खिल जाते जब बाग़ में,रंग-बिरंगे फूल।। चित्त भी पावन हो गया,आस जगी हर ओर। फूल-फूल पर ओस है,नाचे मनवा मोर।। डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  2/2/25

हर शख्स जिंदगी में

Image
  पोस्ट संख्या-55 हर शख्स जिंदगी में by Dr.Purnima Rai हर शख्स जिंदगी में कई किरदार  निभाता है। न चाहते हुए भी वह अपनों को आजमाता है।। सुकून की तलाश में हारने के डर से बेखौफ़, सहजता से लक्ष्य की ओर अग्रसर हो जाता है।। मन अधीर न हो संयम रखता है इस कदर कि, मन-मस्तिष्क की भीतरी तह में घूम आता है।। तलाशते हैं पल भर की एक खुशी जमाने में,  गमज़दा जिस्म मुश्किल से ही चैन पाता है।। सुकर्म कर परवाह न कर औरों की साकी, "पूर्णिमा" राही को राह दीया ही दिखाता है।। डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब