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ਤਹਿਸੀਲਦਾਰ ਕਮ ਚਾਰਜ਼ ਅਫ਼ਸਰ ਵੱਲੋਂ ਸੈਂਸਜ਼ ਫੇਜ਼-2 ਜਨਸੰਖਿਆ ਗਣਨਾ ਦੌਰਾਨ ਚੱਲ ਰਹੀਆਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗਾਂ ਦਾ ਮੁਆਇਨਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।

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ਸੈਂਸਸ 2027 ਫੇਜ਼-2 ਜਨਸੰਖਿਆ ਗਣਨਾ  ਦੌਰਾਨ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ-1 ਅਤੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ-2 ਤਹਿਸੀਲ ਦੇ ਨਿਯੁਕਤ ਸੁਪਰਵਾਈਜ਼ਰ ਅਤੇ  ਇਨੁਮੀਨੇਟਰ ਨੂੰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਪੰਜ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਲਗਾਤਾਰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਬੈਂਚਾਂ ਅਨੁਸਾਰ  ਮੈਰੀਟੋਰੀਅਸ ਸਕੂਲ, ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਵਿਖੇ  ਫੀਲਡ ਟਰੇਨਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਕਰਵਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ।ਅੱਜ ਮਿਤੀ 14 ਅਕਤੂਬਰ ਨੂੰ ਤਹਿਸੀਲਦਾਰ ਸਾਹਿਬਾਨ ਕਮ ਸੈਂਸਸ ਚਾਰਜ਼ ਅਫ਼ਸਰ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ -2 ਸ. ਰੁਪਿੰਦਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਬਲ ਜੀ ,ਟੈਕਨੀਕਲ ਅਸਿਸਟੈਂਟ ਸ. ਜਤਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਸ. ਯਾਦਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋਂ ਉਚੇਚੇ ਤੌਰ ਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਮੁਆਇਨਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ । ਇਸ ਮੌਕੇ ਚਾਰਜ ਅਫਸਰ ਸਾਹਿਬਾਨ ਨੇ ਫੀਲਡ ਟ੍ਰੇਨਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਨੂੰ ਬੈਠ ਕੇ ਕਾਫੀ ਸਮਾਂ ਸੁਣਿਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਵੱਡਮੁੱਲੇ ਵਿਚਾਰ ਸੁਪਰਵਾਈਜ਼ਰ ਅਤੇ ਇਨੁਮਨੇਟਰ ਦੇ ਨਾਲ ਸਾਂਝਾ ਕੀਤੇ ਗਏ। ਉਨਾਂ ਨੂੰ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਮੁਸ਼ਕਿਲਾਂ ਉੱਤੇ ਵੀ ਵਿਚਾਰ ਚਰਚਾ ਕੀਤੀ। ਅਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਚੁਣੋਤੀਆਂ ਅਤੇ ਮੁਸ਼ਕਲਾਂ ਦੇ ਹੱਲ ਲੱਭਣ ਦਾ ਵੀ ਹਰ ਸੰਭਵ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦਿਵਾਇਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਅਲੱਗ-ਅਲੱਗ ਬੈਂਚਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਪਰਵਾਈਜ਼ਰ ਅਤੇ ਇਨੁਮੀਨੇਟਰ  ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਕਰੀਬ 200 ਦੇ ਲਗਭਗ ਸੀ। https://www.facebook.com/share/p/19VppuNnqo/ ਰਿਪੋਰਟ  ਡਾ.ਪੂਰਨਿਮਾ, ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫੀਲਡ ਟ੍ਰੇਨਰ

आकलन( लघुकथा)

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          आकलन( लघुकथा) कुछ पल के लिए आँखें मूंदे हुए स्निग्धा शांत मन से बैठी हुई थी। अपने मन में उठते हुए सवालों एवं जिम्मेदारियों का आकलन कर रही थी। अचानक फोन की घंटी बजती है। हेलो मैडम, मैं श्रेया बोल रही हूँ। क्या आप मुझे समझा देंगे कि यह कार्य कैसे करना है। श्रेया का यह सवाल सुनते ही स्निग्धा उत्तेजित होकर कहती है कि कितनी बार आपको समझाया है। बार-बार वही बातें दोहराई जा रही हैं। आपको जल्दी समझ क्यों नहीं आता है? मुझे तो लगता है कि आप लोग समझना ही नहीं चाहते हैं। स्निग्धा भूल जाती है कि उसका स्वर थोड़ा कर्कश हो गया।कर्कश ध्वनि में सारी बातें सुनकर श्रेया की आँखें भर आती हैं और वह फोन पर ही फूट-फूट कर रोने लगती है। इधर स्निग्धा रोने की आवाज सुनकर थोड़ा घबरा जाती है। स्वयं को दोषी मानती है। अहसास करती है कि उसे धैर्य रखना चाहिए था। ऐसे नहीं बोलना चाहिए था।अभी स्निग्धा सोच ही रही थी कि श्रेया आगे से कहती है कि मैडम सबकी सामर्थ्य व योग्यता एक जैसी नहीं होती है।बार-बार समझाने के बावजूद भी चाह कर भी हम समझ नहीं पा रहे हैं । क्या कार्य हमें पहले करना है और क्या...

मौसम-ए-वक्त़

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मौसम-ए-वक्त़ महकती हुई फूलों की डालियों से महकने का हुनर बाकी है सीखना! एक ही डाली पर उगे हैं सुर्ख गुलाबी फूल , साथ में दिख रहे हैं थोड़े हल्के रंग के भी !! हर तना,हर पत्ता, हर डाली जगा रहें हैं नव आस व विश्वास , मौसम-ए-वक्त़ को सह रहे हैं सूर्य के साथ खिल रहे हैं!! अहसास करवा रहें हैं जीवन का, सभी न होते हैं हमेशा एक समान! उन्नीस-बीस का फ़र्क दिख जाता है चाहे फिर भी जीने की कला रहती है आबाद!! कमतर न समझना कभी स्वयं को, हर ज़र्रा ,हर शख़्स समेटे हुए है कुदरत को फ़िक्र न करना गर कोई बदल ले फितरत को!! डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब। 30/9/26

Teacher's Day Celebration💐

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  Teacher's Day Celebration💐 SOE FOR GIRLS MALL ROAD ,AMRITSAR ਅੱਜ ਮਿਤੀ 5 ਸਤੰਬਰ ਨੂੰ ਸਕੂਲ ਆਫ਼ ਐਮੀਨੈਂਸ ਫਾਰ ਗਰਲ਼ਜ ਮਾਲ ਰੋਡ ਵਿਖੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਮੈਡਮ ਸ਼੍ਰੀਮਤੀ ਮਨਦੀਪ ਕੌਰ ਜੀ ਦੀ ਰਹਿਨੁਮਾਈ ਹੇਠ ਅਧਿਆਪਕ ਦਿਵਸ ਬਹੁਤ ਹੀ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਅਤੇ ਸੁਚੱਜੇ ਢੰਗ ਨਾਲ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ। ਅਧਿਆਪਕ ਦਿਵਸ ਦਾ ਸੁਚਾਰੂ ਪ੍ਰਬੰਧ ਅਤੇ ਸੰਚਾਲਨ ਲੈਕਚਰਾਰ ਮੈਡਮ ਆਦਰਸ਼, ਲੈਕਚਰਾਰ ਮਨਦੀਪ ਕੌਰ,ਮੈਡਮ ਰਮਨ ਕਾਲਿਆ, ਹਿਸਾਬ ਅਧਿਆਪਿਕਾ ਮੈਡਮ ਇਤੀ ਸ਼ਰਮਾ ਅਤੇ ਕੰਪਿਊਟਰ ਅਧਿਆਪਿਕਾ ਮੈਡਮ ਈਸ਼ਾ ਵੱਲੋਂ ਬਾਖੂਬੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਮੈਡਮ ਵੱਲੋਂ ਸਟੇਟ ਅਵਾਰਡ ਲਈ ਨਾਮਜ਼ਦ ਲੈਕਚਰਾਰ ਕਮਲ ਅਰੋੜਾ ਅਤੇ ਕੰਪਿਊਟਰ ਫੈਕਲਟੀ ਪਰਮ ਆਫ਼ਤਾਬ ਸਿੰਘ ਨੂੰ ਸਟੇਟ ਅਵਾਰਡ ਦੇ ਹੱਕਦਾਰ ਦੱਸਦਿਆਂ ਹੋਇਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤੌਰ ਤੇ ਸ਼ੀਲਡ ਦੇ ਕੇ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਸਕੂਲ ਦੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਵੱਲੋਂ ਸਕੂਲ ਦੇ ਸਮੂਹ ਸਟਾਫ ਨੂੰ ਸਕੂਲ ਵਿੱਚ ਨਿਭਾਈਆਆਂ ਸ਼ਲਾਘਾਯੋਗ ਸੇਵਾਵਾਂ ਸਦਕਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਕੇ ਹੌਂਸਲਾ ਅਫਜ਼ਾਈ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਮੈਡਮ ਆਦਰਸ਼ ਵੱਲੋਂ ਸਮੂਹ ਸਟਾਫ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨ ਚਿੰਨ ਵਜੋਂ ਬੈਚ ਭੇਂਟ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਮੈਡਮ ਇਤੀ ਸ਼ਰਮਾ ਵੱਲੋਂ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੀ ਸ਼ਮੂਲੀਅਤ ਕਰਵਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਵੱਖ ਵੱਖ ਪ੍ਰੇਰਨਾਦਾਇਕ ਅਤੇ ਮਨੋਰੰਜਕ ਭਰਪੂਰ ਛੋਟੀਆਂ-ਛੋਟੀਆਂ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੀਆਂ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਕਰਵਾ ਕੇ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਵਿੱਚ ਰੰਗ ਬੰਨ੍ਹਿਆ ਗਿਆ। ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਨੇ ਵੀ ਆਪਣੇ ਅਧਿਆਪਕਾਂ...

आपबीती ---खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह ,हो गई नव जगमगाहट

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  आपबीती ---खुदा के बंदे ने जब सुझाई राह ,हो गई नव जगमगाहट----------(डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब) रात (31अगस्त )को निश्चिंत होकर सो गई कि अब सुबह आराम से ऊठूँगी और अपने सितंबर महीने के कार्य का आगाज करूँगी ।ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर होने के नाते हमें अपने विजिट करने वाले स्कूलों की सूचना पहले फार्म में भरनी होती है ।आज मैंने एक दिन पहले ही वह सूचना भर दी और रात को सो गई। सोये हुए अचानक मुझे एकदम से गोल-गोल सिर घूमने जैसा महसूस हुआ । यह चक्कर बहुत ही खतरनाक था।उस वक्त मेरे मन से यही आवाज आई कि हे भगवान मुझे कुछ नहीं होगा! मैंनें इसी अवस्था में दोनों हाथों की मुट्ठियों को भींच लिया और अपने आप को समझाया कि मुझे कुछ नहीं होगा ।पर चक्कर रुक-रुक आते ही जा रहे थे। मैंनें उठने का प्रयास किया, पर उठ नहीं पाई। फिर मैंनें दायीं करवट बदलनी चाही तो भी मेरा सिर बहुत तेज घूमा। मैंनें फिर बाईं तरफ कोशिश की तो भी मेरा सिर बहुत तेजी से घूमने लगा।इस समय मैं बहुत घबरा भी रही थी और डर भी रही थी ।यही मन में आ रहा था कि कहीं मुझे कुछ हो ना जाये। इसी बीच मेरे हाथ भी सुन्न होने लग गए थे ।थोड़ी देर बाद मैंनें ...

दोहे_पूर्णिमा :रोजगार की खोज में

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  दोहे_पूर्णिमा :रोजगार की खोज में दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी, लोगों की यह भीड़! रोजगार की खोज में,लगी टूटने रीढ़!!१ जनसँख्या दर रोकनी, कुछ तो करो उपाय! शिक्षित हों उल्लास से,बढ़ जायें व्यवसाय!!२ जागृत हों वोटर सभी ,मत निर्णय हकदार! आत्मसजगता भाव ही,प्रगति का आधार!!३ भूख-गरीबी मार से ,लोग हैं परेशान! वोट के बदले नोट से,कहाँ मिले सम्मान!!४ दर-दर भटके जिंदगी,भूत भविष्य वर्तमान! कहे 'पूर्णिमा' विश्व से ,श्रम करना आसान!!५                डॉ.पूर्णिमा राय,  शिक्षिका एवं लेखिका ,पंजाब 11जुलाई ,2026

मेरी तन्हाई-- वापसी (भाग-30)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई-- वापसी (भाग-30) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब अवकाश के दिनों का पता ही नहीं चलता कि कब खत्म हो जाते हैं ।और कभी-कभी ऐसा लगता है कि अवकाश आता ही क्यों है ?समय बीते ही नहीं बिताया जाता है।  इस बार गर्मियों की छुट्टियां जब आई तो पता ही नहीं चला कि कैसे वक्त बीत गया और अब लग रहा है कि क्या आज अंतिम अवकाश का दिन है! सोच रही हूँ कि अवकाश का आनंद सिर्फ अपने मन पर निर्भर करता है। अपनी दिनचर्या से अलग जब हमें अवकाश मिलता है तो हमें काफी अच्छा महसूस होता है। अवकाश और दिनचर्या में फर्क बस इतना होता है कि हम दैनिक कार्यों से अलग होकर वह कार्य करते हैं जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा नहीं होता ।इसलिए हमें अवकाश का आनंद अधिक आता है।इस बार की छुट्टियों में एक भी पल ऐसा नहीं गुजरा जिसमें अपने लिए समय अर्थात खाली समय मिला हो। शिक्षा विभाग की ओर से मेरीटोरियस स्कूल में समर कैंप का आयोजन हुआ। छात्रों को नव तकनीक से शिक्षित किया गया।साथी ऐप पर छात्रों की ऑनलाइन कक्षाओं का कार्य चला। जनगणना संबंधी कार्य ,एस आई आर ,ड्रगस एंवं सोशल इकोनामिक्स जनगणना में अधिकारियों के ड्यूटी चली। ब्राइट माइ...

मेरी तन्हाई-- समय (भाग-29)डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब

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मेरी तन्हाई-- समय (भाग-29) डॉ.पूर्णिमा राय,पंजाब हे ईश्वर !हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है? हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? हम पर ही मुसीबत के पहाड़ क्यों टूट पड़ते हैं? बार-बार तुम हमारे ही घर पर गमों को दस्तक देने के लिए भेज देते हो ?आखिर ऐसा क्यों होता है? हम भी तो तेरे ही बनाए हुए इंसान है? हमारी भी रगों में  अन्य लोगों जैसा ही खून है ?हमने ऐसे कौन से पाप किए हैं ,जिनकी सजा तुम हमें दे रहे हो! एक मुसीबत खत्म नहीं होती ,दूसरी मुसीबत आ जाती है। इन सवालों के कटघरे में हम अपने मन के साथ-साथ अपने भगवान को भी जिस पर हमें विश्वास है, उस ईश्वर को भी कटघरे में खड़ा कर देते हैं। सवालों की जड़ी लगा देते हैं। पर हम शांत मन से सहजावस्था में चाहकर भी उस मुसीबत के दौर से  गुजर नहीं पाते हैं। वह समय बिताये नहीं बीतता है ।हर पल दु:खद एहसास होता रहता है ।यह सब हमारी मानसिक अवस्था एवं भावनात्मक स्तर पर निर्भर करता है ।जब हम दुनिया में इधर-उधर झांकते हैं,अपने स्व: के दुख से इतर इधर-उधर देखते हैं तो हमें आए दिन कोई ना कोई ऐसी दुर्घटना नजर आ जाती है, जिसके साथ साधारणीकरण होने पर हमे...

मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--ख्वाहिश (भाग-28) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  गम की राहों पर चलना ज़रा होशियारी से, खुशियों के फूल खिलते हैं सिर्फ मेहनत से!! जब हम कोई उम्मीद नहीं रखते हैं तो कभी-कभी कुछ ऐसा होता है कि हमारे भीतर स्वत: ही और अधिक ऊर्जा का संचार होना आरंभ हो जाता है। आप सबके जीवन में आए दिन कोई ना कोई खुशी या गमी आती रहती होगी, क्योंकि यह जिंदगी है ।मैंने शायद पहले भी कहीं जिक्र किया होगा कि कोई भी कार्य जो हमने कभी ना किया हो जब हम पहली बार करते हैं तो उसका अनुभव कुछ अलग ही होता है।ऐसे ही मैंने जीवन में कसरत /व्यायाम/योगाभ्यास को कभी महत्व नहीं दिया। पर जब महत्व देने लगी तो अपने भीतर एक सुकून का अनुभव होने लगा। सहजावस्था आने लगी।अपने लिए तो हम अपने पैसे खर्च करके कुछ ना कुछ खरीदते ही रहते हैं या हम दूसरों के लिए भी कई बार कुछ खरीद कर दे देते हैं। कहते हैं जो मन में ठान लो वह आपको मिल जाएगा ।पर कुछ लोग जब कहते हैं कि हमने सोचा था, हमें वह मंजिल नहीं मिली ।तब मन का विचलित होना आवश्यक है।बात चाहे आपको छोटी लगी पर मुझे आपको बताते हुए अच्छा महसूस हो रहा है। मैंनें फरवरी में फ्री ऑ...

मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई- जिंदगी (भाग-27) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब जिंदगी बहुत ही अजीब है ।एक पल में गम के बादल आ जाते हैं तो दूसरे पल में सुख की घटाएं भी दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं‌। लोग कहते हैं कि बादल छा गए हैं ,काली घटाएं आ रही है  पर बादलों के बीच में से चमकती हुई बिजली की तरह सफेद रंग की लकीरें हैं ,वह भी जिंदगी जीने की उम्मीद जगा देती हैं।बस ऐसा ही कुछ आजकल मेरे साथ चल रहा है ।कभी खुशियाँ इतनी आ रही है कि समेट नहीं पा रही और कभी आंँखों से बरसात होने लगती है।कभी दिल पिघल कर मोम जैसा बन जाता है । तो कभी चट्टान जैसा पत्थर दिल हो जाता है।कभी सोचती हूँ कि जिंदगी इम्तिहान ले रही है, परीक्षाएं ले रही है ,क्या मैं उन परीक्षाओं में पास हो पाऊँगी ?बस इसी उधेड़बुन में जिंदगी बीत रही है। छोटी-छोटी खुशियों को बटोरती हुई जिंदगी आगे बढ़ती चली जा रही है ।आज ब्राइट माइंड पंजाब -2026 का प्रोग्राम गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में दशमेश ऑडिटोरियम में हुआ ।जिसमें शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस जी ,मनीष सिसोदिया जी, डायरेक्टर पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग सकत्तर  सिंह बल जी एवं अन्य उच्च ...

मेरी तन्हाई--गहरी नींद (भाग-26)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--गहरी नींद (भाग-26) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब रात को गहरी नींद में सोने से पहले सुबह की योजना के बारे में जानने की इच्छा लिए हुए अचेत मन सो जाता है ।सुबह की योजना से बेखबर मन यही सोचता है कि अब शायद कुछ नहीं हो सकता ।अब कल जो होगा देखा जाएगा। बस यही सोचकर हमारा मन रात को गहन निद्रा में सो जाता है। एक समय था ।जब हम लोग खत लिखते थे, तार भेजते थे तो दो-तीन दिन बाद वह खत मिलता था ।कई बार वह काफी-काफी दिनों बाद मिलता था और हमें सूचना मिलती थी। हमें फिर पता चलता था कि कोई प्रोग्राम होने जा रहा है। आजकल ऑनलाइन का जमाना है। व्हाट्सएप का जमाना आ गया है तो व्हाट्सएप के माध्यम से हमें योजनाओं को बनाने और उन्हें लागू करने में बिल्कुल भी ज्यादा समय नहीं लगता है और सूचना शीघ्र ही भेज दी जाती है। ऐसे ही रात को गहन निद्रा में सोई हुई मैं यह सोचती रही कि कल का कोई प्रोग्राम शायद नहीं होगा। बस इतना सा पता है कि एक मीटिंग होनी है तो मीटिंग का कोई स्थान पता न होने की वजह से बेचैन मन गहन निद्रा में सो जाता है ।आप समझ सकते हैं जब इंसान सो जाता है तो फिर भूल जाता है कि सुबह जो होगा देखा...

मेरी तन्हाई: संकेत भाषा (भाग-25)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई: संकेत भाषा (भाग-25) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब दोस्तो! हमारी भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत बहुत विशाल एवं संपन्न है ।भारतीय परंपराओं को जीवित रखने के लिए हमें बार-बार इन चीजों को दोहराने की आवश्यकता नहीं होती। भारतीय विरासत जिंदा रहे, यही दुआएं रहती हैं।उसके लिए हमें जैसे-जैसे समय बीत रहा है वैसे-वैसे हमें भावी पीढ़ी को उसके प्रति सचेत और जागरूक करने की आवश्यकता होती है। हमारे पूर्वजों ने तथा बड़े-बुजुर्गों ने जो देखा है ,उनके जो अनुभव है वह एक तरह की भारतीय विरासत और परंपरा ही है ।अगर हम अपने बड़े-बुजुर्गों के बताए हुए रास्तों को अपनाकर ही आज जीवनयापन करते हैं तो आज के समय में इस वातावरण के अनुसार जीवन जीना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए आवश्यक है कि हमें अपने बुजुर्गों के बताए हुए अनुभवों को एवं अपनी विरासत को साथ लेकर चलना होगा। पारंपरिक जीवन को वर्तमान के साथ तालमेल बिठाकर जिंदगी जीना आवश्यक है। यह तभी हो सकता है जब हमारे भीतर सुनने की क्षमता हो, हमारे भीतर ठहराव हो, हम अपने भीतर से मैं-मेरी की भावना को समाप्त कर पाएं, तभी हम आगे आज के समय में सुखी और खुशह...

मेरी तन्हाई -हाल-चाल(भाग-24)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई -हाल-चाल(भाग-24) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब जब हम किसी को एक अरसे बाद मिलते हैं तो हमारा पहला प्रश्न होता है --आप कैसे हैं ?तो आगे से उनका जवाब यही आता है कि हम ठीक हैं !फिर वह हमारे परिवार का हाल-चाल पूछते हैं! बच्चों के बारे में पूछते हैं! आसपास के माहौल के बारे में बातें होती है! अगर कोई व्यक्ति जिसे हम मिलते हैं ,वह बीमार है तो हम उसको अपनी ही तरह से नए--नए ढंग तरीके बताने लग जाते हैं कि वह ठीक हो जाए। क्या ऐसा सोचना हमारा सही होता है? बीमार व्यक्ति तो अपनी बीमारी के बारे में बताता है। उसके मन का बोझ हल्का होता है, पर हम उसकी बीमारी के नए-नए ढंग बता कर क्या हम उसके बोझ को हल्का कर रहे होते हैं ?या उसको दबाव में लाकर अपनी बातें लागू करवा रहे होते हैं। हम कभी ऐसा नहीं सोचते। यह भी सोचने का प्रश्न है कि क्या किसी एक बीमारी का इलाज जब हम अपने तरीके से किसी को बताते हैं तो क्या जो फायदा हमें हुआ है या हमने किसी को फायदा होते सुना है, जिसको हम बता रहे हैं क्या उस व्यक्ति को भी उस बात का फायदा होता है। क्या ऐसा हमने महसूस किया है या सिर्फ हम अपनी बात ही कहना चाहते है...

मेरी तन्हाई--प्यार (भाग-23)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--प्यार (भाग-23) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब प्यार एक ऐसा एहसास है जिसे ना तो शब्दों में ब्यां किया जा सकता है, ना ही इसे किसी बंदिश में बांधा जा सकता है ।शक के दायरे से यह बहुत दूर होता है जिसे प्यार का सही मायने समझ आ जाए वही किसी को प्यार कर सकता है।किसी को प्यार करो पर मोह ना करो।प्यार सब कुछ त्यागना जानता है और मोह में इंसान सिर्फ पाने की चाहत रखता है। किसी की अत्यधिक परवाह करना प्यार के अंतर्गत आता है।किसी को जुनून की हद से चाहना यह भी प्यार है। किसी को सिर्फ अपना बनाने की जिद्द करना और उसे हासिल ना कर पाने की चाहत में अपने आप को नुकसान पहुँचाना या जिसको हम प्रेम करते हैं उसको नुकसान पहुँचाना यह प्यार  नहीं है। यह महज एक जुनून होता है। प्यार तो निस्वार्थ है जिसमें किसी भी स्वार्थ की भावना की गुंजाइश नहीं होती। किसी की छोटी-छोटी जरूरत को पूरा करना, किसी के लिए हर वक्त जरूरत पड़ने पर साथ देना यह प्यार का अभिन्न अंग है पर बदले में कुछ हासिल करने की उम्मीद प्यार नहीं महज़ मोह है। इसी मोह को प्यार का नाम दे देना आज के समय में अत्यधिक प्रचलन में आ गया है। तभी तो...

मेरी तन्हाई--प्रकृति (भाग-22)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--प्रकृति (भाग-22) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता है। पंचतत्व निर्मित मानव भी प्रकृति का ही अंग है। प्रकृति और मानव एक दूसरे के पूरक हैं। जून के महीने में बारिश का आना बदलते हुए मौसम और वातावरण की मुँह बोलती तस्वीर है।जैसे ही बारिश आती है तो मन में विचार आता है कि बारिश में तन भीगे पर मन भीगना नहीं चाहिए। इस भाव और विचार का अभिप्राय हर एक व्यक्ति अपने नजरिए से देखेगा। जिसके मन की अवस्था दूसरों के प्रति चिंतित भावना की है, दूसरों के लिए वह सोच रहा है तो वह सोचेगा कहीं इस बारिश से किसी ऐसे व्यक्ति का नुकसान ना हो जाए जिसको बाद में मुश्किल का सामना करना पड़े। जिस व्यक्ति की अवस्था खुश है, खुशहाल जीवन है ,जिसके पास प्यार करने वाले लोग हैं ,वह व्यक्ति यही सोचेगा कि मैं अपने किसी प्रिय जन के साथ इस बारिश का आनंद लूँ। यह अपनी-अपने मन की अवस्थाओं पर निर्भर करता है कि हम किसी भी बदलाव को किस प्रकार स्वीकार करते हैं।प्रकृति के साथ खिलवाड़ होता है तो मानव का भस्म होना और इस सृष्टि का विकास अवरूद्ध हो जाना संभव है।अगर मानव के भीतर से ...

मेरी तन्हाई : प्रेरणा: सुमेल दिवस (21जून विशेष)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई : प्रेरणा: सुमेल दिवस (21जून विशेष) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। एक ऐसा सुमेल दिवस जहाँं, हम अपने तन-मन का सामंजस्य बिठा पायें। व्यायाम करना कसरत करना हमारे शरीर का एक आवश्यक तत्व है। जैसे पांच तत्वों से हमारा शरीर बना है इस तरह योग को भी मैं एक आवश्यक तत्व मानने लगी हूँ। जिसकी तरफ हमारा कभी ध्यान ही नहीं जाता है। शायद मैं भी आपकी तरह ही थी ।कभी जीवन में सैर करना, कसरत करना, व्यायाम करना इसके लिए समय ही नहीं निकाल पाती थी और लगता था कि इसकी मुझे जरूरत भी नहीं थी। इतनी भाग दौड़ भरी जिंदगी बचपन से ही थी जिस वजह से लगता था कि हम ऐसे ही स्वस्थ हैं और सच कहूँ तो मैं अपने बचपन एवं युवावस्था तक  भी स्वस्थ ही रही ।जब हम एक सकारात्मक सोच के साथ जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं तब गरीबी भी हो ,धन का अभाव भी हो पर आपके घर के भीतर सकारात्मकता का संचार  हो तो आप कभी भी अपने आप को अस्वस्थ महसूस नहीं करते हैं। आज की जीवन शैली में बदलाव होने की वजह से ,तकनीकी युग आ जाने की वजह से और वातावरण में धुंधलापन आ जाने से हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने की ...

मेरी तन्हाई--ऊर्जा (भाग-20)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--ऊर्जा (भाग-20) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब आजकल सुबह‌-शाम  हर वक्त कुदरत की तरफ ही ध्यान जाता है ।कुदरत के स्रोत पानी, हवा, धूप ,मिट्टी, पेड़-पौधे उनकी तरफ ही मन लगा रहता है। कभी पानी व्यर्थ नहीं करना है, कभी प्लास्टिक के प्रयोग से खुद को एवं औरों को भी बचाना है ।प्लास्टिक की बोतल इधर-उधर नहीं फेंकनी है। कभी ध्यान आता है कि कोई बेकार चीज का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है? बस इन्हीं छोटे-छोटे चीजों की तरफ ध्यान आकर्षित होता रहता है ।कभी  पौधों को देखती रहती हूँ।कभी पौधों की कटिंग लगाकर नए पौधे उगा रही हूँ ताकि ताज़ी हवा मिल सके ।आजकल आबो-हवा बहुत खराब हो चुकी है ।ऑक्सीजन की कमी हो रही है तो हमें अपने आसपास इनडोर ,आउटडोर प्लांट लगाते रहना चाहिए। मैंने आज ही टर्टल वाइन और पर्पल हार्ट प्लांट को दोबारा से एक और  नया प्लांट बनाया है। पहले भी इन पौधों को मैं पानी में उगा चुकी हूँ। अब मैं आज छोटी-छोटी पानी की बोतल  में इनको लगाया है और मुझे उम्मीद है कि जिस ऊर्जा के साथ आप कुछ नया कार्य करते हैं तो वह ऊर्जा  हमें दूसरों में भी ट्रांसफर करनी चाहिए। दू...

मेरी तन्हाई--तीसरा पहर ( भाग-19)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--तीसरा पहर  ( भाग-19) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब बिजली के गुल होने की असुविधा हर किसी को खलती है पर तब अधिक खलती है जब समय रात का हो। रात के समय बिजली कभी आ रही थी। कभी जा रही थी ।कभी एयर कंडीशनर ऑन होता था, कभी  बंद हो जाता था। इसी चक्कर में कभी स्विच ऑन हो रहा था, कभी स्विच ऑफ कर रही थी। यह सोचकर कि कहीं लाइट एकदम से अधिक आ गई तो कोई नुक्सान न हो जाए ।बस ऐसे ही करते-करते रात का तीसरा पहर आ गया था। कुछ समय बाद पंखे की हवा से ही धीरे धीरे नींद आ गई। सुबह जब उठी तो एक कप चाय के प्याले की तलब हुई । वैसे दिनचर्या में मैं सुबह की चाय अधिकतर नहीं लेती हूँ।उससे पहले शीशे के पास गई और अपने आप को देखकर कहने लगी, मैं ठीक हूँ, मैं स्वस्थ हूँ, मुझे कुछ नहीं हुआ है। पर रात को गर्दन के पास कुछ हल्का सा खराश हो रहा था। शायद किसी चींटी ने काट लिया होगा, पर जब बिस्तर पर देखा तो कुछ भी नहीं था।  उसका हल्का-हल्का निशान गर्दन पर नजर आ रहा था, फिर सोचा कोई बात नहीं यह तो मामूली सी खराश है, ठीक हो जाएगी। फिर किचन में जाती हूँ चाय बनाने के लिये। चाय को बनाकर प्याले में डाल...

मेरी तन्हाई--सुकून (भाग-18)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--सुकून (भाग-18) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब सुबह-सुबह जल्दी उठकर कुदरत का आनंद लेना, पेड़ों की हसीन खिलती हुई टहनियों में गुम हो जाना, राह में मिलते हुए मुसाफिरों को देखकर प्रसन्नचित हो जाना ,आसपास का शांत वातावरण और पास से गुजरती हुई मोटर गाड़ियों की मद्दिम आवाज़ पल भर के लिए आपको आपके अस्तित्व से थोड़ा दूर ले जाती है ।एक ऐसे सुकून की ओर जो आपने कभी अकेले में रहकर भी महसूस ना किया हो ।अक्सर लोग सोचते हैं कि अकेले रहने में ही आनंद है ।अगर हम कुछ समय के लिए अकेले रह लेंगे तो शायद हमें एक आनंद की अनुभूति होगी। हमारा दिमाग व  हमारा दिल शांत हो जाएगा। पर मुझे लगता है कि ऐसा नहीं है। हम इंसानों से दूर होकर महसूस करते हैं कि हम अकेले हो गए हैं।घर में अगर सास ज्यादा अधिक बात करती है तो बहू उससे दूर होकर अकेलेपन का अनुभव करना चाहती है। अगर पति-पत्नी में कहीं झगड़ा हो रहा है तो वह दोनों एक दूसरे से दूर होकर कुछ समय के लिए अकेले रहने का आनंद लेना चाहते हैं। बच्चों को अगर माता-पिता अधिक डांटते हैं तो बच्चे भी उनसे दूर होकर अकेले होकर रहना चाहते हैं । दरअसल किसी को भी यह बा...

मेरी तन्हाई--नया सूर्य (भाग-17)डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

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मेरी तन्हाई--नया सूर्य (भाग-17) डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब  सभी कहते हैं कि हर दिन एक नया दिन होता है। हर शाम हसीन होती है और हर रात में अंधेरे को चीरने की एक अलग एक क्षमता होती है,जो नए सूर्य का आगमन करती है। हर व्यक्ति हर सवेरे नए सूर्य की तलाश में है। गहरी रात के पश्चात निकला सूर्य हर सांस में एक उम्मीद का सिलसिला पैदा करता है।हर व्यक्ति जीवन में किसी न किसी लक्ष्य को आगे लेकर बढ़ रहा है। रात की गहरी चादर के पश्चात जब सूर्य की पहली किरण निकलती है तो उस किरण को देखने का नज़रिया जिस व्यक्ति के पास है।वह व्यक्ति सफलता के शिखर पर पहुंच ही जाता है।हर व्यक्ति के जीवन का कोई न कोई लक्ष्य है, मंजिल है।यह अच्छी बात है कि जीवन में किसी मंजिल का होना, किसी लक्ष्य का होना बहुत ही महत्वपूर्ण है ।स्थिरता जहाँ आ जाती है, वहाँ प्रगति रुक जाती है। निरंतर चलते रहने का नाम ही जिंदगी है। कई बार हम लोग अपनी-अपनी व्यस्तताओं से अपने बनाये हुए दायरे में बंधी हुई जिंदगी जी रहे होते हैं ।हमें लगता है इससे अलग कोई जिंदगी ही नहीं है ,पर जब हम बाहर निकल कर देखते हैं। अपने दायरे की सीमाओं से थोड़ा स...